सेब बागवानी की जीनियस है ये मशीन, करती है कई श्रमिकों के काम, नैनीताल के उद्यमी आनंद कमा रहे लाखों
नैनीताल के मुक्तेश्वर में युवा उद्यमी आनंद ने सेब की ग्रेडिंग-सॉर्टिंग मशीन लगाकर बागवानों को आधुनिक तकनीक का लाभ दिया है।

सरकारी योजना से मिली मशीन।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
किशोर जोशी, नैनीताल । पहाड़ में सेब उत्पादन को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने और किसानों को बेहतर कीमत दिलाने में आधुनिक तकनीक अहम भूमिका निभा रही है। मुक्तेश्वर क्षेत्र के बूढ़ी बाना निवासी युवा उद्यमी आनंद के बगीचे में लगाई गई करीब 10 लाख रुपये कीमत की ग्रेडिंग- सॉर्टिंग मशीन इसका उदाहरण है।
कुमाऊं में अपनी तरह की पहली बताई जा रही यह मशीन सेब की ग्रेडिंग, वाशिंग, क्लीनिंग और सॉर्टिंग का काम एक साथ करने में मदद करती है। इससे बगीचे से निकलने वाले सेब को बाजार में भेजने से पहले उसकी गुणवत्ता और आकार के अनुसार तैयार किया जा रहा है।
इसका सीधा फायदा किसानों और बागवानों को मिलता है। अच्छी तरह साफ, ग्रेडेड और आकर्षक पैकिंग में तैयार फल सामान्य थोक बिक्री की तुलना में सीधे उपभोक्ता बाजार और महानगरों तक पहुंचाने में अधिक उपयोगी साबित होते हैं।
क्या है ग्रेडिंग-सॉर्टिंग मशीन?
- ग्रेडिंग-सॉर्टिंग मशीन ऐसी आधुनिक मशीन है, जो सेब को बाजार में भेजने से पहले उसकी सफाई, धुलाई और आकार व गुणवत्ता के अनुसार छंटाई करने में मदद करती है।
- पारंपरिक तरीके में यह काम मजदूरों द्वारा हाथ से किया जाता है, जिसमें अधिक समय और श्रम लगता है।
- मशीन के इस्तेमाल से प्रक्रिया तेज, एकरूप और अधिक व्यवस्थित हो जाती है।
कैसे काम करती है मशीन
- बगीचे से लाए गए सेब को मशीन में डाला जाता है।
- सबसे पहले सेब की क्लीनिंग और वाशिंग की जाती है, जिससे उस पर लगी मिट्टी, धूल और अन्य गंदगी हट जाती है।
- इसके बाद मशीन में लगे ग्रेडिंग सिस्टम के जरिए सेबों को उनके आकार और निर्धारित मानकों के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाता है।
- इसके बाद अलग-अलग ग्रेड के सेब को पैकिंग के लिए तैयार किया जाता है।
हाथ से छंटाई की जगह मशीन ने घटाया श्रम
पहाड़ के बागानों में सेब की तुड़ाई के बाद उसकी छंटाई और सफाई में काफी श्रम लगता है। अलग-अलग आकार के सेबों को हाथ से चुनना, साफ करना और पैक करना समय लेने वाली प्रक्रिया है। मशीन के इस्तेमाल से यह काम कम समय में किया जा सकता है।
सरकारी योजना से मिली मशीन
मुक्तेश्वर क्षेत्र की बूढ़ी बाना निवासी एमबीए पास आउट युवा आनंद ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के तहत 35 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ लेकर करीब 10 लाख रुपये की मशीन स्थापित की है। इसके साथ मुद्रा ऋण की मदद से कारोबार में पूंजी की जरूरत भी पूरी की गई। आनंद ने स्थानीय 10 लोगों को रोजगार भी दिया है।
