हल्द्वानी, जेएनए : गांव के क्वारंटाइन सेंटरों में प्रवासियों के ठहरने के साथ ही अव्यवस्थाओं का मामला चर्चा में है। दूसरी तरफ शहरों में सुविधायुक्त सरकारी शेल्टर होम खाली होने के बावजूद जरूरतमंद लोग नहीं मिल रहे। खाने, सोने, शौचालय से लेकर हर तरह की सुविधा इन राहत केंद्रों में है। नियमानुसार पहाड़ से लौटने वाले बाहरी प्रवासियों को घर भेजने तक इनमें ठहराया जाना है, मगर इन प्रवासियों के पहले ही निकल जाने से शेल्टर होम खाली पड़े हैं।

 

पिछले एक माह से सिर्फ यहां दो लोग रखे गए हैं। उन्हें अभी घर भेजने की व्यवस्था नहीं बन सकी है। लॉकडाउन की शुरुआत में बड़ी संख्या में लोग हल्द्वानी में फंस गए थे। इनमें दिल्ली, हरियाणा से लौटे पहाड़ के लोगों के अलावा पहाड़ में काम करने वाले उप्र व अन्य राज्यों के श्रमिक भी थे। ठहराने के लिए बद्रीपुरा स्टेडियम, एमबी इंटर कॉलेज, एमबी डिग्री कॉलेज व लालकुआं के एक बरात घर को राहत केंद्र के तौर पर विकसित किया गया था। तीन टाइम भोजन के साथ मनोरंजन के लिए टीवी तक की व्यवस्था थी। तनाव दूर करने के लिए योग करवाया जाता था।

 

एक बार संख्या एक हजार तक पहुंच गई थी। क्वारंटाइन अवधि पूरी करने पर इन लोगों को घर भेज दिया गया। जिसके बाद एमबी स्कूल को पास केंद्र बनाया गया। जबकि कॉलेज व बरातघर का संचालन भी बंद कर दिया गया। वर्तमान में सिर्फ स्टेडियम में असम व उप्र के दो लोगों को रखा गया है। नोडल अधिकारी एके कटारिया ने बताया कि पहाड़ पर काम करने वाले बाहरी राज्यों के प्रवासियों को इनमें अब भी रखा जाएगा, लेकिन ऐसे लोग नहीं मिल नहीं रहे। इसकी वजह पूर्व में सरकारी व निजी साधनों से लोगों के अपने घर लौट जाना भी है।

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