नैनीताल [जेएनएन] : सूबे में निकाय चुनाव को लेकर सरकार बुरी तरह फंस गई है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से चुनाव के लिए तैयारियां पूरी होने के दावों के बाद हाई कोर्ट के एक सप्ताह में चुनाव प्रक्रिया शुरू करने के आदेश के अनुपालन को सरकार के पास विकल्प सीमित हैं। सरकार इस मामले में अब कोर्ट के समक्ष आदेश में संशोधन के लिए पुनर्विचार याचिका दायर कर सकती है। इसके लिए शासनस्तर से हरी झंडी का इंतजार किया जा रहा है।

दरअसल, राज्य के निकायों का कार्यकाल तीन मई को ही पूरा हो गया था। इससे पहले ही नौ मार्च को राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से सरकार को निकाय चुनाव से संबंधित कार्यक्रम भेज दिया गया था, जिसमें दो अप्रैल को आयोग की ओर से अधिसूचना जारी करने, तीन अप्रैल को जिला निर्वाचन अधिकारी व राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने, चार से आठ अप्रैल तक नामांकन, 29 अप्रैल को मतदान का कार्यक्रम तय किया गया था। आयोग के कार्यक्रम में तीन मई को नए निकाय बोर्डों की अधिसूचना जारी होनी थी, मगर जब सरकार की ओर से चुनाव कार्यक्रम पर मुहर नहीं लगी तो आयोग ने दो अप्रैल को हाई कोर्ट में दस्तक दे दी। इधर तीन मई को सरकार ने निकाय बोर्डों को भंग कर दिया। इसके बाद आयोग द्वारा जून में निकायों की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया था।

नए सिरे से परिसीमन हुआ तो फिर खिसकेंगे चुनाव

हाई कोर्ट के आदेश के बाद यदि राज्य सरकार ने निकायों के नए परिसीमन के अनुसार चुनाव कराए तो राज्य निर्वाचन आयोग को नए सिरे से मतदाता सूची तैयार करनी होगी। मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम में कम से कम दो माह का समय लगेगा, जबकि एक माह चुनाव प्रक्रिया के लिए। आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट के अनुसार आयोग की ओर से मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जा चुका है। आयोग पूरी तरह चुनाव को तैयार है।

राज्य में निकाय

नगर निगम -  08

नगर पालिका - 42

नगर पंचायत -42

सरकार लेगी निर्णय

महाधिवक्‍ता एसएन बाबुलकर ने इस बारे में कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में राज्य निर्वाचन आयोग को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। निकाय चुनाव मामले में सरकार निर्णय लेगी।

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Posted By: Skand Shukla