विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

ढाई लाख लोगों की प्यास बुझाने वाली गौला पर सिस्टम की लापरवाही, नदी बनी कूड़ाघर

Published: Fri, 10 Apr 2026 01:37 PM (IST)

हल्द्वानी की जीवनदायिनी गौला नदी लापरवाही के कारण कूड़ाघर बन गई है, जिससे ढाई लाख लोगों का पेयजल और हजारों किसानों की सिंचाई प्रभावित हो रही है।

हल्द्वानी, हल्दूचौड़ से लेकर बिंदुखत्ता तक के काश्तकार गंदगी से परेशान. Jagran

हल्द्वानी, हल्दूचौड़ से लेकर बिंदुखत्ता तक के काश्तकार गंदगी से परेशान. Jagran

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। गौला ने इस शहर को क्या नहीं दिया। ढाई लाख की आबादी को पीने के लिए पानी दिया। हल्द्वानी और आसपास के करीब आठ हजार काश्तकारों को फसल लहलहाने के लिए पानी दिया।

इसके अलावा मानसून में बहकर आने वाले उपखनिज ने खनन कारोबार खड़ा कर साढ़े सात हजार वाहनस्वामियों, चालकों से लेकर इससे जुड़े अन्य लोगों को रोजगार भी दिया लेकिन जीवनदायिनी कही जाने वाली इस नदी को बदले में मिला कचरा। सिस्टम की लापरवाही से गौला के अलग-अलग हिस्से कूड़ेदान बन चुके हैं। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की गाड़ियां इन ढेर के आगे से अक्सर गुजरती है मगर नीचे उतर हालत सुधारने का जिम्मा कोई नहीं उठा रहा।

गौला नदी शहरी और ग्रामीण क्षेत्र को दो हिस्सों में बांटती है। एक तरफ हल्द्वानी का पुराना शहर तो दूसरी तरफ गौलापार। यह नदी लालकुआं, बिंदुखत्ता से शांतिपुरी तक पहुंचती है। हल्द्वानी के लोग करीब ढाई लाख शीशमहल स्थित फिल्टर प्लांट में शोधन के बाद इसी नदी का पानी पीते हैं। इसके अलावा गौलापार, लामाचौड़, रामपुर रोड, बरेली रोड से लेकर बिंदुखत्ता तक के हजारों काश्तकार इसी के पानी से खेतों को सींचते हैं। लेकिन कई जगहों पर गौला की स्थिति दयनीय हो चुकी है।

नदी के मुहाने पर कचरे का ढेर

चोरगलिया रेलवे क्रासिंग के बाद नदी के मुहाने पर कचरे का ढेर नजर आया। राजपुरा में नदी क्षेत्र को मानो ट्रंचिंग ग्राउंड बना दिया है। इसके अलावा कई अन्य जगहों से हर दिन भारी मात्रा में कूड़ा नदी में पहुंच रहा है। चिंता की बात यह है कि इसमें सामान्य कचरे के साथ ही बायोमेडिकल वेस्ट के तौर पर सिरिंज, इस्तेमाल की गई पट्टी-रूई और दवा के रेफर व बोतलें भी नजर आई। चिंता की बात यह है कि गूल-नहरों के माध्यम से पालतू मवेशी और जंगली जानवर इसी पानी को पीते हैं।

नगर निगम की ओर से नियमित सफाई की जाती है। इस क्षेत्र को भी साफ किया जाएगा। गंदगी से जुड़ी जमीन पर वन विभाग से लेकर रेलवे तक का स्वामित्व है। संबंधित विभाग से भी पत्राचार किया जाएगा। - परितोष वर्मा, नगर आयुक्त

एनजीटी में पहुंचा मामला, 27 को अगली सुनवाई

गौला बाईपास स्थित ट्रंचिंग ग्राउंड में रामनगर को छोड़ जिले के अन्य क्षेत्रों का कचरा पहुंचता है। रोजाना करीब 230 मीट्रिक टन नया कचरा यहां डंप हो रहा है। हल्द्वानी निवासी दीप चंद्र पांडे ने मामले में एनजीटी में शिकायत दर्ज की है। शिकायत में कहा कि इस जगह से आवासीय क्षेत्र 150 से 180 मीटर दूरी पर होने के साथ ही 20 मीटर दूर हाईवे है।

कूड़े के निस्तारण की प्रक्रिया ठीक नहीं है। पांडे ने कहा कि ठोस अपशिष्ट औैर जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2016 का उल्लंघन किया जा रहा है। नियमों का उल्लंघन कर तय मानक से ज्यादा दूरी पर खाई खोदी गई है। जिससे नदी का पानी भी प्रदूषित हो रहा है। इस पानी का प्रयोग पेयजल, कृषि और मत्स्य पालन के लिए किया जाता है।

एनजीटी ने 27 अप्रैल को सुनवाई की अगली तारीख तय करते हुए राज्य सरकार से जवाब भी मांगा है। इससे पूर्व 2024 में ट्रंचिंग ग्राउंड से जुड़ी समस्या को लेकर समाजसेवी हेमंत गौनिया भी एनजीटी पहुंचे थे। इसलिए दोनों मामलों को एक साथ सूचीबद्ध् किया गया है।

यह भी पढ़ें- एनजीटी ने चारधाम यात्रा की वहन क्षमता पर उत्तराखंड सरकार से मांगा जवाब, 21 जुलाई को अगली सुनवाई

यह भी पढ़ें- एनजीटी की ओर से नदियों में गाद निकालने पर रोक से नाराज मंत्री गोयल; बोले राज्य को सुने बिना फैसला ठीक नहीं