हल्द्वानी, जेएनएन : अक्सर पहाड़ी उत्पादों की पैरवी करने वाले पूर्व सीएम हरीश रावत अब सोशल मीडिया पर 'मडुवा जिंदाबाद' कहेंगे। हरदा के मुताबिक, उत्तराखंड में होने वाले पहाड़ी उत्पाद पलायन रोकने में कारगर साबित हो सकते हैं। बस जरूरत है इनके प्रचार की, ताकि उत्पादों का उपयोग बढ़ाया जा सके। फेसबुक पर पूर्व सीएम ने अपने नए अभियान की पोस्ट डालकर मडुआ जिंदाबाद पेज से जुडऩे की अपील भी की है।

अपनी सरकार के दौरान स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग होने और त्रिवेंद्र सरकार में इनकी उपेक्षा का आरोप लगाकर हरीश रावत कई बार मुखर हो चुके हैं। ककड़ी, रायता, आम और काफल पार्टी का आयोजन कर वह सुर्खियां भी बटोर चुके हैं। इन पार्टियों के जरिये हरदा सत्ता पक्ष पर कटाक्ष करने के साथ ही कांग्रेस को एकजुट करने का प्रयास भी करते रहते हैं। फेसबुक पोस्ट पर उन्होंने कहा है, 'चार-साढ़े चार साल पहले मैंने मडुआ, झुंगरा, भट्ट, गहत और रामधाना आदि अंसिंचित क्षेत्र की फसलों का प्रचार करने के साथ ही उत्पादों की न्यूट्रिशनल वैल्यू को भी लोगों के सामने रखा था। अब मेरा फोकस पीला नींबू, गेठी, ककड़ी, काफल, भुजैला, सिंगाड़ा और पिनाले से बनने वाली कचरी पर है। यह उत्पाद पलायन रोकने में सक्षम है। इसलिए मडुआ जिंदाबाद पेज बना रहा हूं।' पूर्व सीएम ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग जो भी सवाल करेंगे, हफ्ते में एक बार उनका जवाब भी दूंगा।

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Posted By: Skand Shukla

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