नैनीताल, [जेएनएन]: केंद्र सरकार ने हिमालयी राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के केंद्रीय जैव प्रौद्योगिकी विभाग ने उत्तराखंड के साथ ही त्रिपुरा व नगालैंड में केचुओं पर शोध के लिए एक करोड़ की परियोजना को मंजूरी प्रदान दे दी है। इसमें से उत्तराखंड के लिए 42 लाख रुपये मंजूर हुए हैं। 

कुमाऊं विवि के जंतु विज्ञान के प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट के निर्देशन में राज्य में इस परियोजना का संचालन किया जाएगा। शोध के अंतर्गत केचुओं के डीएनए की बारकोडिंग भी की जाएगी। 

दरअसल, कुमाऊं में रोजाना टनों के हिसाब से जैविक कूड़ा एकत्र तो हो रहा है, मगर उसका निस्तारण नहीं हो रहा है। इस कूड़े को वर्मी कंपोस्ट में बदलने के लिए यह शोध महत्वपूर्ण होगा। केचुआ मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाता है। वह यह क्रिया कैसे करता है, इसको लेकर भी परियोजना में अध्ययन किया जाएगा। 

नई प्रजाति तैयार करने पर होगी रिसर्च 

प्रो. सतपाल बिष्ट बताते हैं कि तीन वर्षीय इस परियोजना के अंतर्गत तीनों राज्यों में जैविक कूड़े का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। केचुओं में अध्ययन कर इसका उपयोग जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं में सुनिश्चित किया जाएगा। जैविक कूड़े के निस्तारण में केचुओं व उनसे संबंधित जीवाणुओं की उपयोगिता पर भी शोध किया जाएगा। प्रयोगशाला में भी नई प्रजातियां विकसित करने पर भी रिसर्च होगी।  बेहतर प्रजातियों के केचुओं की प्रजातियां तैयार कर जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाई जाएगी। 

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