नैनीताल, जेएनएन : कुमाऊं विश्वविद्यालय से संबद्ध निजी बीएड कॉलेजों में अप्रवासी भारतीय कोटे में दाखिले में फर्जीवाड़ा होने का अंदेशा है। इन प्रकार की शिकायतों को देखते हुए कुलपति प्रो. केएस राणा ने निजी कॉलेजों में बीएड की एनआरआइ कोटे में दिए गए प्रवेश से संबंधित रिकॉर्ड तलब किया है। उन्होंने साफ किया है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दाखिला निरस्त किया जाएगा। कुलपति ने यह भी साफ किया है कि बीएड की रिक्त 907 सीटों पर दाखिले का अधिकार कॉलेजों को नहीं मिलेगा बल्कि विवि की ओर से बनी कमेटी द्वारा पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर कॉलेजों में प्रवेश दिए जाएंगे।

दरअसल, प्रत्येक निजी बीएड कॉलेज की पांच फीसद सीटें एनआरआइ कोटे के लिए आरक्षित होती हैं। अप्रवासी भारतीयों को मिट्टी से जुड़े रहने व उनके पाल्यों के लिए यह व्यवस्था की गई है मगर निजी बीएड कॉलेज इन सीटों में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर दाखिला देते रहे हैं। अब कुलपति प्रो. केएस राणा ने एनआरआइ कोटे में दाखिलों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया है। कमेटी से अभिलेख तलब कर जांच करने को कहा गया है। साफ किया कि इसमें फर्जीवाड़ा पकड़ा गया तो प्रवेश निरस्त करने के साथ ही कॉलेज की संबद्धता निरस्त करने के लिए कुलाधिपति को संस्तुति भेजी जाएगी।

कुलपति ने बताया कि खटीमा के कॉलेज को छोड़कर बीएड की 907 सीटें फिलहाल रिक्त हैं। कुलपति प्रो. केएस राणा ने कहा कि अब बीएड की रिक्त सीटों के लिए काउंसलिंग नहीं होगी बल्कि काउंसलिंग को बनाई कमेटी द्वारा सीधे पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर अभ्यर्थियों को कॉलेज आवंटित किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को खुद विवि में संपर्क करना होगा। एनआरआइ कोर्ट में दाखिले की जांच के आदेश जारी किए गए गए हैं। फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं होगा।

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Posted By: Skand Shukla

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