संवाद सहयोगी, रामनगर: खेतों में तैयार खड़ी गेहू की फसल के खराब होने की आशका से क्षेत्र के अन्नदाता इन दिनो काफी चिंतित हैं। लॉकडाउन की वजह से उनके सामने फसल काटने से लेकर उसे बेचने तक कई तरह की दिक्कत है। उन्हे बारिश व आग की वजह से फसल नष्ट होने का डर भी सता रहा है।

राज्य सरकार द्वारा गेहूं की फसल का समर्थन मूल्य 1925 रुपये क्विंटल तय किया जा चुका है। सरकार की ओर से एक अपै्रल से क्रय केंद्र खोलने की तैयारी थी, लेकिन लॉकडाउन की वजह से गेहू क्रय केंद्र अब तक नहीं खुल पाए है। इधर रामनगर क्षेत्र में अधिकांश काश्तकारों की गेहू की फसल तैयार हो चुकी है। 12 से 14 अप्रैल से फसल कटना भी शुरू हो जाएगी। काश्तकार किसी तरह श्रमिकों की व्यवस्था कर गेहू को काट भी लें तो उनके सामने क्रय केंद्र नहीं होने की वजह से फसल को घर में ही रखने की सबसे बड़ी समस्या पैदा हो जाएगी। ऐसे में यदि काश्तकार फसल को बेचेंगे नहीं तो उनके सामने रोजी रोटी का संकट भी पैदा हो जाएगा।

कंदला गांव के काश्तकार परमजीत सिंह ने बताया कि रामनगर में गेहू क्रय केंद्र कब तक खुलेंगे, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। गेहू काटने के बाद उसे रखने के लिए काश्तकारों के पास घरों में उतनी जगह नहीं है। यदि गेहू को काटकर खेत में ही छोड़ते है तो बारिश व आग से फसल खराब होने व जलने का खतरा बना हुआ है। इस कारण काश्तकार सबसे बड़ी दुविधा में हैं।

Posted By: Jagran

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