यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kisan Andolan : कानून वापस होने से गदगद तराई के किसान नेता गदगद, जानिए किसने क्या कहा
Kisan Andolan प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु पर्व पर नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की तो तराई ...और पढ़ें

रुद्रपुर, जागरण संवाददाता : Kisan Andolan : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरु पर्व पर नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की तो तराई के किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। यही नहीं भाजपा में भी खुशी का माहौल है। यूएस नगर किसान बाहुल्य जिला है। केंद्र सरकार ने नए कृषि कानून पिछले साल 26 नवंबर को लागू किया था। इसके विरोध में किसान गाजीपुर बार्डर पर धरने पर बैठ गए। साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन होने लगा तो केंद्र सरकार ने इसे कानून को स्थगित कर दिया था। साथ ही एक कमेटी बना दी गई इसके बाद भी किसानों का आंदोलन और गाजीपुर बार्डर पर धरना जारी रहा। सरकार ने 358 दिन बाद यानी शुक्रवार को नए कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की। इस पर किसान से जुड़े संगठनों ने कहा कि कानून वापस लेना किसानों की जीत है। साथ ही खुशी जताई। राजनीतिक दलों ने किसानों की जीत बताया।
बेकार नहीं गई शहादत : विर्क
तराई किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष तजिंदर सिंह वर्क ने बताया कि यह किसानों की सबसे बड़ी जीत है। देश के अन्नदाता की जीत है। कृषि क्रांति की जीत है। एक साल से संघर्ष और 700 से अधिक किसानों की शहादत बेकार नहीं गई। उन्हीं की देन है कि आज हमारी जीत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुपरब के मौके पर किसानों को बड़ी राहत दी है। किसान अभी भी अन्य मुद्दों को उठाते रहेंगे।
एमएसपी गारंटी जुड़ने चाहिए : कलसी
तराई किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सलविंदर सिंह कलसी ने कहा कि किसानों की बड़ी जीत निश्चित हुई है, लेकिन इसमें कुछ और मांगों को भी जोड़ना चाहिए था। इसमें एमएसपी गारंटी जुड़ने चाहिए था। क्योंकि कहीं न कहीं वहीं खड़े रहे जहां पहले थे। बिहार जैसी स्थिति बनने से बचने के लिए कृषि कानून वापस लेने का निर्णय लिया है। हरियाणा जैसी स्थिति बनानी है उसके लिए एमएसपी गारंटी जरूरी है। किसानों की एक साल की मेहनत रंग लाई।
पीएम मोदी देर से जागे : ठुकराल
वरिष्ठ किसान नेता, रुद्रपुर सतपाल सिंह ठुकराल ने कहा कि किसान आंदोलन को एक वर्ष होने को हैं। प्रधानमंत्री मोदी देर में जगे हैं। किसानों की बात देर से समझ आई है। पहले समझ नहीं आई। खेद है कि सात सौ किसानों के शहादत के बाद कृषि कानून वानस हुआ। किसानों की जीत है। जिन्होंने जाने गवां कर सरकार को जगाने का काम किया। गेंहूं और धान को सरकार नही खरीद रही। हमारा नुकसान आपदा में भी हुआ है। सरकार नुकसान की भरपाई करें। सभी शहीद किसानों को मुआवजा एवं नौकरी मिले।
