नैनीताल (जेएनएन) : काठगोदाम व हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पर भले ही यात्रियों की सुविधाओं के दुरुस्त होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। सुविधाओं के नाम पर स्टेशनों पर आधी-अधूरी व्यवस्था आए-दिन दिव्यांग व बुजुर्ग यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। दोनों रेलवे स्‍टेशनों पर यात्री सुविधाओं का ख्‍याल नहीं रखा गया है। नैनीताल व अल्‍मोड़ा सहित कई पर्यटन स्‍थलों के लिए लाखों यात्री इन दोनों स्‍टेशनों के माध्‍यम से आते जाते हैं। देश ही नहीं विदेशी पर्यटकों का बड़ी संख्‍या में अावागमन होता है। ऐसे में इस समस्‍या से देश की छवि भी धूमिल हो रही है।

आखिरी छोर पर है दिव्‍यागों के लिए बना रैंप : काठगोदाम स्टेशन पर रोजाना हजारों के तादाद में यात्रियों का आवागमन रहता है। इनमें कुछ दिव्यांग यात्री भी होते हैं, जिनकी सुविधा को देखते हुए काठगोदाम स्टेशन पर प्लेटफार्म एक से दो पर जाने के लिए रैंप की व्यवस्था तो है, लेकिन वह स्टेशन के आखिरी छोर पर है, जिसकी सामान्य यात्रियों के लिए बनाए गए फ्लाईओवर से औसतन दूरी सौ मीटर की है। इस रैंप से होकर जाने में एक स्वस्थ व्यक्ति को लगभग 10 से 15 मिनट का वक्त लगता हैं। इस मार्ग पर आधी अधूरी टिनशेड की व्यवस्था है। इसकेचलते धूप हो या फिर बारिश, दिव्यांग यात्रियों को ट्रेन तक पहुंचने के लिए परेशानी झेलनी पड़ती है।

प्‍लेटफार्म एक के ल‍िए रैंप की सुविधा, दूसरे के ल‍िए नहीं : हल्द्वानी स्टेशन पर भी दिव्यांगों के लिए प्लेटफार्म एक पर जाने के लिए रैंप की सुविधा है, लेकिन दो पर जाने के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिसके कारण अक्षम यात्रियों और उनके परिजनों के पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं, या तो अक्षम यात्रियों के परिजन उनको उठाकर जैसे-तैसे पार कराएं। अगर उठा कर नहीं ले जा सकते हैं तो प्लेटफार्म के छोर पर रेलवे ट्रेक पार कर कॉलोनी को जाने वाले रास्ते का प्रयोग करना होगा। इसमें काफी वक्त लग जाता है। दिव्यांग यात्री के परिजन सौरभ सिंह कहते हैं, हल्द्वानी हो या काठगोदाम स्टेशन, दिव्यांगों के लिए रैंप की सही व्यवस्था नहीं है। सरकार केवल हवा-हवाई ही दिव्यांगों की हितों की बात करती है।

हाई कोर्ट के आदेशों के अनुसार हमने काफी चीजों की व्यवस्था सही कर ली हैं। कुछ सुविधाएं उपलब्ध करानी रह गई हैं, जिनपर हमारे विभागीय अधिकारियों की चर्चा चल रही है। जल्द उन्हें भी सुचारू कर दी जाएगी।

- राजेंद्र सिंह, पीआरओ, इज्जतनगर मंडल रेलवे

यह भी पढ़ें : हादसों पर लगाम की तैयारी, अब जिले में निजी कंपनी खोजेगी सड़कों के डेंजर जोन

यह भी पढ़ें : गौला के सात हजार मजदूरों को नहीं सताएगी ठंड, पहली बार मिलेगी जैकेट

Posted By: Skand Shukla