हल्द्वानी, जेएनएन : एसटीएच कोविड अस्पताल ने एक गंभीर मरीज की जान बचाने को लेकर मिसाल कायम की है। संक्रमण को लेकर अत्यधिक संवेदनशील मामला होने पर भी गंभीर मरीज की डायलिसिस की गई। दूसरे मरीजों को संक्रमण न हो, इसके लिए भर्ती मरीज वाले बेड पर ही एक ही दिन में डायलिसिस मशीन स्थापित कर दी। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैंसोड़ा ने डॉक्टरों व तकनीकी स्टाफ की इस पहल की सराहना की है।

 

जनसंपर्क अधिकारी आलोक उप्रेती ने बताया कि 30 मई को हल्द्वानी का एक 53 वर्षीय रोगी अस्पताल में पहुंचा। वह कोरोना संदिग्ध था। उसे हाइ ब्लड प्रेशर की समस्या थी और उसके दोनों किडनी खराब हैं। उसकी हालत बेहद नाजुक थी। पहले भी उस मरीज की दिल्ली के प्राइवेट अस्पताल में डायलिसिस हो रही थी। यहां पर भी उसकी डायलिसिस होना जरूरी था। कोरोना संक्रमण के चलते मरीज को डायलिससि सेंटर ले जाना संभव नहीं था। मेडिसिन विभाग के प्रो. एसआर सक्सेना ने रोगी का परीक्षण किया और डायलिसिस की सलाह दी।

 

उन्होंने प्राचार्य व चिकित्सा अधीक्षक से चर्चा कर उसी बेड पर डायलिसिस का इंतजाम कर दिया। सिविल इंजीनियर व इलेक्ट्रिक इंजीनियर ने पानी व बिजली और आरओ प्लांट वहीं स्थापित कर दिया। उसी रात 10:30 बजे मरीज की डायलिसिस हो गई। मरीज सामान्य हालात में आ गया। अब उसका अन्य बीमारियों को लेकर उपचार चल रहा है। एक बार फिर उसकी डायलिसिस होनी है।

 

प्रो. सीपी भैंसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर से लेकर अन्य स्टाफ भी सेवा भाव से कार्य में जुटा है। मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों की ओर से किडनी फेल्योर वाले मरीज की जान बचाने के लिए किया गया प्रयास सराहनीय है। कोविड-19 मरीजों का भी बेहतर देखभाल व इलाज हो रहा है।

 

टीम में ये रहे शामिल

इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी, डॉ. एसआर सक्सेना, डॉ. माधव, डॉ. योगेश यादव, डायलिसिस टेक्नीशियन राहत हुसैन, उप प्रबंधक विद्युत रवि पाल, सहायक अभियंता सिविल पंकज बोरा का सहयोग रहा।

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