हल्द्वानी, जेएनएन : उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के डिग्री कॉलेजों में कार्यरत 127 शिक्षकों को प्रोफेसर पदनाम का तोहफा दे दिया है। इससे शिक्षकों में खुशी है। यह प्रक्रिया पिछले एक साल से शासन में लंबित चल रही थी। इसके लिए प्रभारी सचिव उच्च शिक्षा अशोक कुमार ने मंगलवार को आदेश भी जारी कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह लाभ कॅरियर एडवांसमेंट योजना के तहत दिया गया है। इसके लिए निदेशालय स्तर पर स्क्रीनिंग चयन समिति गठित थी। इस समिति की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रस्ताव के आधार पर ही प्रोफेसर पदनाम देने की स्वीकृति दी गई है।
एमबीपीजी कॉलेज के 20 शिक्षक शामिल कुमाऊं के सबसे बडे़ एमबीपीजी कॉलेज में 150 शिक्षक कार्यरत हैं। यहां पर 20 एसोसिएट प्रोफेसर अब प्रोफेसर बन गए हैं। इनमें डॉ. हेमंत कुमार शुक्ला, डॉ. सुचिता शाह, डॉ. सीएस नेगी, डॉ. विभेष कुमार सिंह, डॉ. नवीन भगत, डॉ. चंद्रशेखर जोशी, डॉ. महिमा जोशी, डॉ. बचीराम पंत, डॉ. तेज बहादुर सिंह, डॉ. कैलाश चंद्र, डॉ. आनंद प्रकाश सिंह, डॉ. सिराज मोहम्मद, डॉ. शांति नयाल, डॉ. चंद्रा खत्री, डॉ. दीपा गोबाड़ी, डॉ. प्रभा पंत, डॉ. बीना मथेला, डॉ. देवयानी भट्ट, डॉ. विनय कुमार शामिल हैं। इसी तरह उच्च शिक्षा निदेशालय में कार्यरत उप निदेशक डॉ. केके पांडे व डॉ. एचएस नयाल को भी प्रोफेसर बनने का लाभ मिला है।

साक्षात्कार के समय हुआ था विवाद
प्रोफेसर पदनाम के साक्षात्कार के दौरान निदेशालय में काफी विवाद भी हुआ था। तब आरोप लगा था कि यूजीसी के नियमों का उल्लंघन किया गया है। सेवानिवृत शिक्षकों को भी साक्षात्कार के लिए बुलाया गया है। निर्धारित पदों के आधार पर प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है।

निदेशालय ने कॉलेजों से लिया था उधार
इस प्रक्रिया के लिए तत्कालीन निदेशक डॉ. सविता मोहन की ओर से एमबीपीजी कॉलेज व राजकीय महिला डिग्री कॉलेज से छात्रनिधि के करीब चार लाख रुपये उधार लिए गए थे, जो अभी तक नहीं चुकाए गए हैं।

कोर्ट ने नए सिरे से प्रक्रिया के दिए थे निर्देश
उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से फरवरी 2018 से प्रोफेसर पदनाम के लिए प्रक्रिया चली। अगस्त में राजकीय महाविद्यालय दोषापानी में कार्यरत राजनीतिक विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आरएस भाकुनी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस पर कोर्ट ने विभाग को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के तहत नए सिरे से प्रक्रिया करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। इसके बाद मार्च 2018 में फिर कोर्ट ने अवमानना नोटिस भी जारी किया था।
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