हल्द्वानी, जेएनएन : भारत सरकार ने आम आदमी को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के लिए जनऔषधि केंद्र खुलवाए थे, लेकिन जिले में रेड क्रास सोसाइटी की लापरवाही और प्रशासन की अनेदखी के चलते इन दवा केंद्रों पर ताला लगने की नौबत आ गई। रेड क्रास सोसाइटी के पूर्व सचिव की खरीद प्रक्रिया की वजह से जिले के छह जनऔषधि केंद्रों में आठ लाख रुपए से अधिक का उधार है। अब नए सचिव डॉ. रश्मि पंत ने जन औषध‍ि दवा केंद्रों को फिर से संचालित करने के लिए बीपीपीआइ से साढ़े सात लाख रुपये की डिमांड की है।

डॉ. रश्मि पंत, सचिव, रेड क्रास सोसाइटी ने बताया कि दवाइयों की खरीद से लेकर अन्य खर्चों की जांच करना आसान नहीं है। एक-एक कागज की जांच करनी थी। नए लाइसेंस बनाए जाने थे। यह प्रक्रिया पूरी कर बीपीपीआइ को साढ़े सात लाख की डिमांड की गई। बजट आते ही नई दवाइयां खरीदी जाएंगी। 

दवा लेने वाले मरीज निराश लौटने को मजबूर 

पिछले डेढ़ साल से जिले के छह जनऔषधि केंद्रों में दवा नहीं मिल रही है। यह जनऔषधि केंद्र सरकारी अस्पतालों में खुले हैं। मरीज दवा लेने पहुंचते हैं, लेकिन निराश लौटने को मजबूर होते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम बेलवाल का कहना है कि गरीब मरीजों के पास पैसा नहीं होता है। जब वे जनऔषधि केंद्र में सस्ती दवा लेने जाते हैं, तो उन्हें दवा नहीं मिलती है।

एक साल से चल रही जांच

पिछले एक साल से जनऔषधि केंद्रों में मनमाने तरीके से हुई खरीद की जांच चल रही है। डीएम सविन बंसल ने जांच कमेटी गठित की थी। साथ ही शासन स्तर पर भी ऑडिट हुआ था। इसमें करीब आठ लाख का नुकसान सामने आया है। अब इसकी भरपाई करना मुश्किल हो गया है। इसके लिए केंद्र सरकार के अधीन संचालित बीपीपीआइ (ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयूज ऑफ इंडिया) से साढ़े सात लाख रुपये की डिमांड की गई है।  

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Posted By: Skand Shukla

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