नैनीताल, जेएनएन : बहुचर्चित एनएच मुआवजा घोटाला मामले में आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट के बाद अब आरोप तय करने को लेकर बहस शुरू हो गई है। कुल 26 आरोपियों पर आरोप तय होने हैं। मुख्य आरोपित माने जा रहे पूर्व भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह ने बहस करते हुए खुद को बेकसूर करार दिया।

गुरुवार को जिला जज एवं विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण की कोर्ट में आरोप तय करने पर बहस शुरू की। सरकार की ओर से डीसीजी फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने बहस करते हुए कहा कि आरोपितों द्वारा साजिश के तहत एनएच चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहण की गई जमीन की श्रेणी बदली। साथ ही राजकोष को करीब पांच सौ करोड़ का नुकसान पहुंचाया। इस घोटाले के मामले में ऊधमसिंह नगर जिले के एडीएम वित्त प्रताप सिंह शाह द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया। इस घोटाले की जांच एसआइटी द्वारा की जा रही है। एसआइटी अब तक घोटाले के आरोपितों डीपी सिंह, भगत सिंह फोनिया, रामसनुज, अनिल कुमार, मदन मोहन पलडिय़ा, विकास कुमार, भोले लाल, जीशान, ओम प्रकाश, अर्पण सिंह, अनिल कुमार शुक्ला, नंदन सिंह नगन्याल, मोहन सिंह, संतराम, अमर सिंह, गणेश प्रसाद निरंजन, तीरथपाल सिंह, रघुवीर सिंह, हरजिंदर सिंह, हीरा लाल, दिलबाग सिंह, विक्रमजीत सिंह, मनदीप सिंह, संजय चौहान, चरन सिंह पर आरोप पत्र दाखिल कर चुकी हैं। आरोपितों में एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, किसान, डाटा एंट्री ऑपरेटर, स्टांप वेंडर, रजिस्ट्रार कानूनगो, चकबंदी व सहायक चकबंदी अधिकारी, पेशकार, संग्रह अमीन हैं।

गुरुवार को अभियोजन की बहस के बाद मुख्य आरोपित डीपी सिंह ने बहस करते हुए खुद को बेकसूर बताने के साथ ही कहा कि जिस तरह के आदेश उनके द्वारा पारित किए गए, वैसे ही आदेश अन्य अफसरों ने पारित किए, लेकिन उन्हें आरोपित नहीं बनाया गया। उन्होंने जमीन की श्रेणी बदलाव में किसी तरह कमीशन लेने से साफ इनकार किया। कोर्ट शुक्रवार को भी मामले में सुनवाई जारी रखेगी। आरोपितों के अधिवक्ताओं की बहस के बाद आरोप तय करेगी। 

Posted By: Skand Shukla

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