जासं, हल्द्वानी : सिस्टम की लापरवाही की वजह से हीरानगर निवासी एक बुजुर्ग तीन दिन तक फोन पर लोगों को यह बताते रहे कि वह कोरोना संक्रमित नहीं है। आप गलत नंबर पर फोन कर रहे हैं। आठ अलग-अलग नंबरों से फोन पहुंचने की वजह से उन्हें तनाव भी झेलना पड़ा। जांच से पहले दर्ज कराए मोबाइल नंबर पर ओटीपी आने का सिस्टम होने के बावजूद लिस्ट में गलत नंबर चढ़ाना लापरवाही को बयां करता है।

रामपुर रोड पर आइटीआइ तिराहे वाली सड़क पर क्वालिटी बैंक्वेट हाल के पास रहने वाले 76 वर्षीय एलडी पांडे हीरानगर स्थित उत्थान मंच के सलाहकार भी है। पांडे के मुताबिक ऐहतियात के तौर पर 11 सितंबर को उन्होंने कोरोना जांच करवाई थी। जिसमें वह निगेटिव आए थे। गुरुवार से लेकर शनिवार तक उनके पास मोबाइल व पीएनटी नंबरों से लगातार फोन पहुंचने शुरू हो गए। दूसरी तरफ से बात करने वाले शख्स ने कभी कहा कि वह बेस अस्पताल से बोल रहा है तो कभी कोरोना कंट्रोल रूम से। इसके अलावा पुलिसकर्मियों के फोन भी पहुंचे। आमतौर पर स्वास्थ्य विभाग से लिस्ट लेने के बाद संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों की तलाश करने के लिए पुलिस व एलआइयू कर्मी पूछताछ जरूर करते। वरिष्ठ नागरिक एलडी पांडे ने बताया कि हर बार फोन पर उनसे पूछा जाता था कि यह किसी उपाध्याय का नंबर है और वह पॉजिटिव है। जिसके चलते उन्हें खासा परेशानी का सामना करना पड़ा। तो संक्रमित को कब मिली जानकारी: उत्थान मंच के सलाहकार संग हुए इस मामले से स्वास्थ्य विभाग की मानीटरिग पर भी सवाल खड़े होते हैं। तीन दिन उनसे फोन कर कहा गया कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। नाम बताने के बाद दूसरी तरफ से फोन कटता था। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि इस दौरान वह व्यक्ति जो कि संक्रमित निकला था। उसे इस बाबत कोई जानकारी थी या नहीं। लोग खुद रिपोर्ट लेने पहुंच रहे: रोडवेज के ठीक सामने स्टेडियम वाली गली में सीएमओ के कैंप कार्यालय के बाहर इन दिनों सुबह से लोग गेट पर जुट जा रहे हैं। गेट पर खड़े यह लोग कोविड जांच कराने के तीसरे दिन खुद रिपोर्ट लेने आ रहे हैं। जबकि नियम के अनुसार जांच के बाद रिपोर्ट आने तक क्वारंटाइन होना चाहिए। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि अगर किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है और वह खुद घर से बाहर टहले तो संक्रमण का खतरा और बढ़ेगा। वर्जन

इस तरह की समस्या आने पर तुरंत कंट्रोल रूम में सूचना देनी चाहिए। सैंपलिंग ज्यादा होने की वजह से कई बार नंबर गलत फीड हो जाते हैं। वहीं, पाजिटिव आने पर मैसेज के जरिये पहले ही सूचना भेज दी जाती है।

डा. रश्मि पंत, एसीएमओ

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