हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : आड़ू उत्पादन में नैनीताल जिला बीते कई सालों से अग्रणी है। नैनीताल जिले में भीमताल, रामगढ़ आदि जगहों पर बहुतायत में आड़ू उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। जिसमें आड़ू की तैयार फसल देश की विभिन्न मंडियों में भेजी जा रही है। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। हल्द्वानी मंडी में पूरे कुमाऊं से आड़ू लाया जा रहा है। जहां इसे 25 से 30 रुपये प्रति किलोग्राम भाव से बेचा जा रहा है। जबकि इसका खुदरा मूल्य 60 से लेकर 90 रुपये तक है। लेकिन फल उत्पादक बागवान सस्ती कीमत पर आड़ू बेचने को मजबूर हैं।

हल्द्वानी मंडी में वर्तमान समय में रेड जून प्रजाति का आड़ू बहुतायत में आ रहा है। खट्टे-मीठे स्वाद का यह आड़ू साइज व रंग में भी बेहतरीन है। लेकिन पहाड़ से ट्रकों में लदकर हल्द्वानी पहुंचने के बाद इसकी कीमत घट जा रही है। थोक रेट में किसान या उत्पादक को मूल्य के हिसाब से निराशा ही हाथ लग रही है। जिसका असर है कि आड़ू उत्पादन के प्रति किसानों की रुचि लगातार घट रही है।

बिचौलिए काट रहे चांदी

आड़ू उत्पादन में पौधे व फल की देखभाल, फलों की ग्रेडिंग व शॉर्टिंग के बाद इसे मंडी लाया जाता है। ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी किसान को ही उठाना पड़ रहा है। इसके बाद 25 से 30 रुपये किलोग्राम के अनुसार फल का दाम मिलने से किसानों को मायूस होना पड़ रहा है। जबकि बिचौलिए इसे दिल्ली की मंडी में मंहगी कीमत पर बेच रहे हैं। जिसे उत्तराखंड से देश की विभिन्न मंडियों तक पहुंचाया जा रहा है।

लॉकडाउन से रेट हुआ आधा

आड़ू उत्पादन में लॉकडाउन का भी बड़ा असर पड़ा है। लॉकडाउन के चलते बेहतर पैदावार के बाद भी मांग में कमी आई है। हल्द्वानी मंडी अध्यक्ष मनोज शाह ने बताया कि किसानों को अन्य वर्षों के मुकाबले इस साल आधे रेट पर आड़ू देना पड़ रहा है।

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Edited By: Skand Shukla