हल्द्वानी, अभिषेक राज : चीन के सुर में सुर मिलाने वाले नेपाल ने अब भारतीय चैनलों को बाहर का रास्ता दिखाने की तैयारी की है। इसके लिए उसने बकायदा क्लीन फीड (विज्ञापन मुक्त) नीति जारी की है। इसके तहत भारतीय टीवी चैनल कार्यक्रम के बीच में विज्ञापन का प्रसारण नहीं कर सकते। यह नीति आठ अक्टूबर से पूरे नेपाल में प्रभावी होगी। इसका पालन नहीं करने वाले चैनलों का प्रसारण रोक दिया जाएगा।

नेपाल में भारतीय समाचार से लेकर मनोरंजक टीवी चैनल लोकप्रिय हैं। करीब सातों प्रदेशों में नेपाली की अपेक्षा हिंदी चैनलों की बेहतर पैठ है। मधेश में तो भारतीय चैनलों की टीआरपी पहले पायदान पर रहती है। नेपाली चैनलों की पूछ तक नहीं। बात चाहे फिल्म की हो या फिर धारावाहिक। यहां घर-घर में भारतीय चैनलों की पैठ है। ऐसे में नेपाली और विदेशी कंपनियां भारतीय चैनलों में ही विज्ञापन प्रसारित करती हैं। इनकी अपेक्षा नेपाली चैनलों की आमदनी एक चौथाई भी नहीं होती।

 

नेपाल सरकार का मानना है कि भारतीय चैनलों के प्रभाव के कारण नेपाली चैनलों की स्थिति दयनीय हो गई है। ऐसे में उसने आठ अक्टूबर से विदेशी चैनलों के लिए विज्ञापन मुक्त प्रसारण नीति लागू कर दी है। इसके बाद भारतीय चैनलों को नेपाल से विज्ञापन मिलना करीब बंद हो जाएगा। ऐसे में बगैर आय प्रसारण मुश्किल हो जाएगा।

 

सालाना करीब आठ अरब की आय की उम्मीद

नेपाल विज्ञापन संघ के अनुसार विदेशी चैनलों के विज्ञापन मुक्त प्रसारण से नेपाली चैनलों को सीधे-सीधे लाभ होगा। इससे भारतीय चैनलों को सालाना करीब आठ अरब नेपाली रुपये की होने वाली आमदनी नेपाली चैनलों के हिस्से आएगी। इससे उनकी स्थिति बेहतर होगी।

 

जुलाई में भी पांच चैनलों का प्रसारण किया था बंद

न पाल ने भारत सीमा विवाद को तूल देने का आरोप लगाकर जुलाई में भी पांच समाचार चैनलों के प्रसारण पर रोक लगाई थी। हालांकि बाद में भारत सरकार के दखल के बाद नेपाल ने प्रतिबंध वापस ले लिया।

 

विज्ञापन मुक्त नीति नेपाली चैनलों के लिए संजीवनी

नेपाल फेडरेशन ऑफ केबल टेलीविजन एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील पुराजुली ने बताया कि विज्ञापन मुक्त नीति नेपाली चैनलों के लिए संजीवनी साबित होगी। इसके लिए भारतीय सहित सभी विदेशी चैनलों को शीघ्र ही अपने प्रसारण प्रारूप में बदलाव करना होगा। ऐसा नहीं हुआ तो सरकार की नीति के अनुसार उनका प्रसारण आठ अक्टूबर से रोक दिया जाएगा।

 

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