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संकटमोचक भी हैं कार्बेट के गजराज, बाघों को काबू करने व शिफ्टिंग में भी मददगार

Published: Wed, 12 Aug 2026 02:05 PM (GMT+05:30)

कार्बेट टाइगर रिजर्व के पालतू हाथी बाघों के संरक्षण और रेस्क्यू अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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त्रिलोक रावत, रामनगर। कार्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) 260 बाघों के साथ देश का नंबर वन टाइगर रिजर्व यूं ही नहीं है, बल्कि इनके संरक्षण में यहां के पालतू हाथियों का भी योगदान है।

पहली बार कार्बेट से राजाजी टाइगर रिजर्व हरिद्वार में पांच बाघों के चुनौतीपूर्ण मिशन की सफलता के पीछे कार्बेट के अनुभवी पालतू हाथियों की मुख्य भूमिका रही है। यही नहीं हल्द्वानी क्षेत्र में जब बाघ आतंक का पर्याय बन गया तो उसे काबू करने में कार्बेट के हाथी ही संकटमोचक बने।

कार्बेट के हाथी ही बने संकटमोचक

कार्बेट के जंगल में वन्यजीवों की सुरक्षा व संरक्षण में यहां के अनुभवी हाथी किसी संकटमोचक से कम नहीं है। वर्तमान में यहां 16 नर-मादा हाथी है। इनमें कुछ मादा हाथी काफी अनुभवी है। कार्बेट के जंगल से वर्ष 2020 से 2025 तक एक-एक करके राजाजी टाइगर रिजर्व भेजे गए दो बाघ और तीन बाघिनों को ट्रेंकुलाइज कर रेस्क्यू करने में वनकर्मियों और डाक्टरों की टीम के साथ लक्षमा, पवनपरी, गोमती, शिवगंगे, सोनाकली हाथिनियों ने फ्रंटलाइन वारियर की तरह काम किया।

कार्बेट का घना जंगल और ऊबड़-खाबड़ रास्तों वाले कई इलाके ऐसे हैं, जहां न तो वनकर्मी पैदल जा सकते थे और न ही कोई गाड़ी पहुंच सकती थी। ऐसे दुर्गम और खतरनाक क्षेत्रों में सिर्फ ये पालतू हाथी ही टीम के लिए एकमात्र सहारा हैं।

कार्बेट के निदेशक साकेत बडोला बताते हैं कि अनुभवी हथिनियां रेस्क्यू टीम को बाघ के नजदीक तक ले जाती हैं। जंगल में ये निडर हाथी पीछे हटने के बजाए बाघ का सामना करते हैं। इसी निडरता की वजह से रेस्क्यू टीम बाघ को रेस्क्यू कर पाती है। वर्तमान में कार्बेट के जंगल में 1224 जंगली हाथी है।

ऋषिकेश में हाथी व हल्द्वानी में दिखा अनुभवी हाथियों का कमाल

कार्बेट के पालतू हाथी बाहरी क्षेत्रों में भी रेस्क्यू के लिए भेजे जाते हैं। वर्ष 2022 में सात माह के भीतर छह लोगों को फतेहपुर रेंज (हल्द्वानी) में बाघ ने मार डाला था। जनाक्रोश बढ़ा तो वन विभाग को गुजरात के जामनगर से निजी जू से करीब 30 एक्सपर्ट की टीम करीब माह भर तक यहां डटी रही।

जब सभी के हाथी खाली रहे तो हमलावर बाघ को जंगल में खोजने के लिए कार्बेट की अनुभवी हथिनी आशा व पवनपरी ही काम आई। बाघ रेस्क्यू कर कार्बेट ले जाया गया। इससे पूर्व 2011 में मुनिकीरेती ऋषिकेश में कई लोगों पर हमला करने वाले नर हाथी को पकड़ने के लिए कार्बेट से पवनपरी, गोमती व अलबेली हथिनी को भेजा गया था। एक माह में मिशन पूरा करने के बाद हथिनी लौटी थीं।

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