दीप चंद्र बेलवाल, हल्द्वानी : Corbett National Park Pakhro range safari scam : कार्बेट पार्क (Corbett National Park) के कालागढ़ डिवीजन (Kalagarh Division) के पाखरों रेंज (Pakhro Zone) में टाइगर सफारी (Tiger Safari) के नाम पर 215 करोड़ बर्बाद कर दिए गए। दूसरे मद का पैसा डीएफओ और रेंजर से सांठगांठ कर टाइगर सफारी के काम में खपा दिया। ठेकेदार से काम की एवज में मोटा कमिशन लिया गया। विजिलेंस की जांच में यह राज खुला है।

एनटीसीएम के निरीक्षण में मिली थीं खामियां

विश्व प्रसिद्ध जिम कार्बेट टाइगर रिजर्व की पाखरों रेंज के 106 हेक्टेयर वन क्षेत्र में टाइगर सफारी बननी थी। 2019 में इसका निर्माण कार्य बिना वित्तीय स्वीकृत्ति के शुरू कर दिया गया। पेड़ काटने व अवैध निर्माण की शिकायत मिलने पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया था। जिसमें अनियमितताएं सामने आई।

जेल में हैं रेंजर डीएफओ ले लिया स्टे

सरकार ने प्रकरण की जांच हल्द्वानी सेक्टर की विजिलेंस को सौंप दी और अगस्त 2022 में पूर्व डीएफओ किशन चंद व रेंजर बृज बिहारी शर्मा पर प्राथमिकी हुई। रेंजर को विजिलेंस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जबकि पूर्व डीएफओ स्टे ले चुके हैं। उनके स्टे खारिज करने के लिए विजिलेंस कसरत कर रही है।

पाखरों रेंज में 215 करोड़ के कामों की समीक्षा

विजिलेंस सूत्रों के अनुसार पाखरों रेंज में 215 करोड़ के कामों की समीक्षा की जा चुकी है। अभिलेखों का भौतिक सत्यापन व कर्मचारियों के बयान दर्ज करने पर पता चला कि टाइगर सफारी के नाम पर खर्च हुआ पैसा दूसरे काम के लिए था। जिसे कमिशन व अन्य लालच में ठेकेदारों को आवंटित कर दिया। अभी तक हुए निर्माण कार्य किसी काम आने वाले नहीं हैं।

सेंसटिव जोन में हो गए पक्के निर्माण

गड़बड़ी करने वाले अधिकारी इस बात को लेकर भी आश्वस्त थे कि उन्हें जो पैसा बाद में मिलेगा। उसे उसी मद में जमा कर दिया जाएगा। जिस जगहों पर सड़क, भवन व अन्य निर्माण कार्य हुए वह कोर सेंसिटिव जोन में आता है। यहां पर किसी भी तरह के निर्माण कार्य नहीं हो सकते हैं।

स्टे खारिज होगा या सीधे चार्जशीट दाखिल

पूर्व डीएफओ किशन चंद को कोर्ट से राहत मिली है। विजिलेंस उनकी गिरफ्तारी के लिए दांव पेंच आजमा रही है। विजिलेंस के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उनके पास प्रर्याप्त सबूत हैं, जो पूर्व डीएफओ की गिरफ्तारी के लिए मददगार साबित होंगे। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि स्टे खारिज होकर डीएफओ की गिरफ्तारी होगी या विजिलेंस को अभियोजन की अनुमति लेकर सीधे चार्जशीट दाखिल करना होगा।

संपत्ति की जांच कर सकती है विजिलेंस

हल्द्वानी सेक्टर की विजिलेंस पूर्व डीएफओ किशन चंद व रेंजर बृज बिहारी शर्मा की संपत्ति की जांच भी कर सकती है। विजिलेंस इस पूरे प्रकरण में कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती है। एक-एक सबूत जुटाकर केस को मजबूत किया जा रहा है। इससे पहले दोनों अधिकारियों के दफ्तरों व घरों से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज विजिलेंस जब्त कर चुकी है।

निदेशक के आदेश को किया दरकिनार

कालागढ़ रेंज के पूर्व डीएफओ किशन चंद ने निदेशक के आदेश को भी दरकिनार कर दिया था। बिना वित्तीय स्वीकृत्ति के निर्माण कार्य की जानकारी मिलते ही कार्बेट पार्क के निदेशक ने रोक लगाने के निर्देश दिए थे।

साथ ही रेंजर बृज बिहारी शर्मा की लापरवाही पर उसे निलंबित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन डीएफओ उस पर मेहरबान रहे।

एसपी विजिलेंस देहरादून धीरेंद्र गुंज्याल ने बताया कि पाखरों रेंज में टाइगर सफारी के नाम पर घोटाला हुआ। इस प्रकरण की जांच जारी है। लगभग 215 करोड़ के खर्च का मिलान किया जा चुका है।

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Edited By: Skand Shukla

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