चम्पावत, जेएनएन : उत्तर भारत के प्रसिद्ध मां पूर्णागिरि धाम में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्तावित रोप-वे सपना बनकर रह गया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 15 जून 2015 को 35 करोड़ की लागत से बनने वाले रोप-वे का शिलान्यास किया था, लेकिन तब से अब तक शिलान्यास स्थल पर एक ईट भी नहीं रखी जा सकी है। रोपवे का निर्माण न होने से पूर्णागिरि के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भैरव मंदिर से नौ किमी की खड़ी चढ़ाई पार कर मंदिर पहुंचना पड़ रहा है।

रोप-वे निर्माण के लिए नई दिल्ली की केआर आनंद एंड केआरए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को निवेशक कंपनी बनाया गया। 25 अप्रैल 2016 को मुख्य कार्यकारी अधिकारी उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की अध्यक्षता में रोप-वे परियोजना की समीक्षा बैठक हुई। इसमें रोप-वे के निवेशक ने चार माह के भीतर फील्ड स्तर पर कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया था। लेकिन तब से अब तक रो-पवे निर्माण का कार्य आगे बढ़ाने की दिशा में एक भी कदम आगे नहीं बढ़ाया गया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की मांग के बाद आठ सितंबर 2016 को राज्य सरकार ने पर्यटन मंत्री को रोप-वे निर्माण के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।

 

पर्यटन मंत्री के दखल के बाद कार्यदाई एजेंसी ने निर्माण क्षेत्र में पानी भरने की बात कहते हुए हाथ खड़े कर दिए। 2018 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने देहरादून में दिल्ली की कंपनी के नुमाइंदों को बुलाकर इस संबंध में जानकारी हासिल की थी, तब कंपनी के अधिकारियों ने स्वाइल टेस्टिंग फिर से कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद न तो इस संबंध में कोई बैठक हुई और न ही स्वाइल टेस्टिंग दुबारा कराने के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस प्रयास किए गए हैं। रोप-वे का निर्माण अधर में लटकने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

 

900 मीटर बनना है रोप-वे

ठूलीगाड़-पूर्णागिरि रोप-वे का निर्माण यूरोपियन सेफ्टी तकनीकि से किया जाना है। रोप-वे की लंबाई 900 मीटर प्रस्तावित है। डबल रोप पर चलने वाली ट्रालियों में एक बार में 80 लोग और एक घंटे में एक हजार लोग आवाजाही कर सकते हैं। इसके बन जाने के बाद भैरव मंदिर से मां पूर्णागिरि मंदिर तक लगभग 11 किमी की खड़ी चढाई से श्रद्धालुओं को निजात मिलेगी।

 

स्वाइल टेस्टिंग कराने का प्रयास

जिला पर्यटन अधिकारी चम्पावत लता बिष्ट ने बताया कि रोप-वे के निर्माण से पूर्व कंपनी के अधिकारियों व विशेषज्ञों ने फिर से स्वाइल टेस्टिंग करवाने की मांग की है। इसके लिए शासन और प्रशासन स्तर पर स्वीटजरलैंड के विशेषज्ञों को बुलाकर स्वाइल टेस्टिंग करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्वाइल टेस्टिंग होने के बाद रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जाएगी। हरी झंडी मिलने के बाद कार्य शुरू कर दिया जाएगा। निर्माण में देरी होने से इसकी लागत अब 35 करोड़ से ज्यादा हो जाएगी। 

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