टनकपुर, जेएनएन : नेपाल अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इंडो नेपाल बॉर्डर के मिसिंग पिलर 811 पर स्थित नो मैंस लैंड पर रोक के बावजूद नेपाली नागरिकों ने शनिवार को चौथे दिन भी निर्माण कार्य जारी रखा। नेपाली नागरिकों ने बंधे के किनारे तक पिलर गाड़ दिए हैं। एसएसबी जवान जब शुक्रवार को अतिक्रमण कार्य रूकवाने गए तो नेपाली नागरिकों ने उन पर पथराव शुरू कर दिया। लोगों के आक्रोश को देखते हुए जवान वापस लौट आए। जिसके बाद एसएसबी ने बॉर्डर पर आने जाने से पूरी तरह से रोक लगा दी। नेपाली नागरिकों की हठ धर्मिता से अंदेशा है कि उन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के साथ महेंद्र नगर में संचालित भारत विरोधी संगठन भी उन्हें उकसा रहा है। जिस कारण वह किसी भी सूरत में अतिक्रमण कार्य रोकने व हटाने के लिए तैयार नहीं है।

इंडो नेपाल बॉर्डर के पिलर नंबर 811 के समीप नो मैंस लैंड पर नेपाल वन समिति व नेपाली नागरिकों द्वारा अतिक्रमण के उद्देश्य से विगत पांच छह दिन से तारबाड़ किए जाने का कार्य शनिवार को भी जारी रहा। शुक्रवार शाम को जब एसएसबी की टीम निर्माण कार्य रूकवाने गई तो आक्रोशित नेपाली नागरिकों ने अपनी जमीन बताते हुए टीम पर पथराव शुरू कर दिया। मामला आगे न बढ़े इस पर एसएसबी की टीम वापस आ गई। उन्होंने इसकी सूचना मुख्यालय को दी। सूत्रों का कहना है कि शनिवार को एसएसबी के उच्चाधिकारी भी वहां पर देखने गए थे। नेपाली नागरिकों के आक्रोश को देखते हुए एसएसबी के आफिसर वापस लौट आए। एसएसबी ने बॉर्डर पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और किसी को भी नेपाल के ब्रहमदेव जाने की इजाजत नहीं है। शनिवार को नेपाल एपीएफ द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए मांगे गए दो दिन का समय भी पूरा हो गया लेकिन अतिक्रमण हटाने के बजाय अतिक्रमण और बढ़ा दिया है।

नेपाल ने नहीं होने दिया था पिलर नंबर 811 से सर्वे

नेपाल में माओवाद खत्म होने के बाद से इंडो नेपाल सीमा को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच कई बार वार्ता व बैठकें हो चुकी हैं। हालांकि जमीनी स्‍तर पर बैठकों को कोई सार्थक नतीजा नहीं दिखा है। कोरोना महामारी के लॉकडाउन से पूर्व सर्वे आफ इंडिया की टीम को टनकपुर भेजा गया था। टीम को लखीमपुर खीरी से चम्पावत के बीच मिसिंग व क्षतिग्रस्त पिलरों का निर्माण किया जाना था। उस दौरान बैठक में भी विवादित पिलर नंबर 811 से सर्वे शुरू किए जाने की बात कही गई थी लेकिन नेपाल की टीम नहीं मानी। जिसके बाद लखीमपुर खीरी से सर्वे शुरू किया। टीम के तीन माह टनकपुर रहने के बाद भी भारत नेपाल सीमा पर बने पीलरों का समाधान नहीं हो पाया और मई माह में कोरोना वायरस के चलते सर्वे आफ इंडिया की टीम को देहरादून बुला लिया गया। नेपाल द्वारा 811 पिलर नंबर से सर्वे न कराए जाने के पीछे भी अतिक्रमण कराए जाने की बात भी सामने आ रही है।

चंपावत जिले में है 16 पीलर

चम्‍पावत जिले में लगे भारत नेपाल सीमा पर कुल 16 पीलर है। जिसमें बूम में तीन टनकपुर में सात व बनबसा में छह पीलर है। जिसमें कई पीलर गायब हो गये तो कई छतिग्रस्त हो चुके है। यही 811 पीलर है जिसमें विवाद हुआ। 

डीएम ने नेपाल स्थित भारतीय अंबेसी को दी सूचना

नो मैंस लैंड पर अतिक्रमण के चलते हुए विवाद मामले की डीएम एसएन पांडे ने नेपाल में तैनात भारतीय एंबेसी के अधिकारियों से वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने अपने स्तर से नेपाल प्रशासन से वार्ता करने के लिए कहा है। वहीं एसएसबी व जिला प्रशासन द्वारा उच्चाधिकारियों के माध्यम से रिपोर्ट गृह मंत्रालय भेज दी गई है।

नेपाल एपीएफ द्वारा अतिक्रमण हटाने के लिए दो दिन का समय मांगा गया था लेकिन अतिक्रमण हटाना तो दूर नेपाली नागरिकों द्वारा एसएसबी पर पथराव किए जाने व अतिक्रमण बंधे तक किए जाने की जानकारी मिली है। डीएम के माध्यम से नेपाल स्थित भारतीय एंबेसी व गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी गई है। कंचनपुर एसपी से भी इस संबंध में भी वार्ता की गई उन्होंने भी अतिक्रमण हटाने का आश्वासन दिया है। -लोकेश्वर सिंह, पुलिस अधीक्षक चम्पावत

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