जागरण संवाददाता, नैनीताल: कोरोना काल में सरोवरनगरी में रामलीला मंचन पर असमंजस बढ़ गया है। अब तक रामलीला मंचन के लिए तालीम कहीं भी शुरू नहीं हो सकी है। इस वजह से नवरात्र में इसबार रामलीला मंचन मुश्किल है। हाल ही में सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के अनुसार एक साथ सौ लोगों के जमा होने की अनुमति दी जा सकती है, ऐसे में रामलीला मंचन को लेकर उम्मीद भी जगी है।

शहर के तल्लीताल, मल्लीताल श्रीराम सेवक सभा, शेर का डांडा-सात नंबर, सूखाताल, नारायणनगर, समीपवर्ती मंगोली व ज्योलीकोट में रामलीला मंचन होता है। शहर में रामलीला का सौ साल से भी पुराना इतिहास है। कोरोना काल में प्रसिद्ध नंदादेवी महोत्सव भी श्रीराम सेवक सभा की ओर से प्रतीकात्मक तौर पर मनाया गया। श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन की अनुमति नहीं दी गई। अब रामलीला मंचन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

आयोजन समितियों पर भी कार्यकारिणी के साथ ही रामभक्तों का दबाव है। एसडीएम विनोद कुमार का कहना है कि नई गाइडलाइन के अनुसार आयोजन में सौ लोगों की अनुमति दी जा सकती है। जल्द इस संबंध में बैठक ली जाएगी।

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पात्र ही सौ तो, दर्शक कहां जाएंगे

नैनीताल : कोविड-19 में अनलॉक की नई गाइडलाइन के अनुसार सौ लोगों को एक स्थान पर जमा होने की अनुमति दी जा सकती है। मगर रामलीला मंचन में कई दृश्यों में मुख्य व साथी कलाकार ही दर्जनों तक हो जाते हैं। इसके अलावा कलाकारों द्वारा पात्रों का मेकअप शारीरिक दूरी का अनुपालन करते हुए नहीं किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि 15 जून से होने वाली तालीम अब तक शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में रामलीला मंचन की संभावना बेहद कम बनी हुई है।

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