राजेंद्र सिंह मिताड़ी, खटीमा। दैवीय आपदा से कराह रही देवभूमि में पानी की प्रलय ने हिमालय को हिलाकर रख दिया है। सड़कें खाई में समा चुकी हैं, वह पर्यटन स्थल जहां 12 महीनों पर्यटकों का मेला रहता है उनका देश दुनिया से संपर्क भंग हो चुका है, वाहन तैरते दिख रहे हैं, सड़कें तालाब का रूप ले चुकी हैं, मकान धराशाई हो रहे हैं, लोगों से घरों से वाहर न निकलने की अपील की जा रही है और कई जिंदगियां मलबे में दफन हो चुकी हैं...। ऐसी दहशत के बीच धामी उम्मीद की किरण बने हैं।

वीवीआइपी दर्जा छोड़  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य की जनता के आंसू पोछने के लिए जनसेवा के मोर्चे पर खुद आ डटे हैं। मौसम विभाग की भविष्यवाणी सच साबित हुई। दो मंडलों वाले इस राज्य में तीन दिन की आसमानी आफत ने जिस तरह कहर बरपाया उससे कुमाऊँ तो बुरी तरह हिल चुका है। जहां-तहां लगातार शव मलबे से निकल रहे हैं। प्रशासनिक तंत्र लोगों से घरों से बाहर न निकलने की अपील कर रहा है, ऐसे में राज्य के मुखिया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लोगों के आँसू पोछने में जुट गए।

मंगलवार को हवाई सर्वेक्षण के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री धामी अपने क्षेत्र खटीमा पहुंचे। वीवीआइपी घेरा और हूटर मारती लक्जरी कारों के काफिले के साथ मौजूद अधिकारियों की फौज उस वक्त देखती रह गई जब धामी को पता चला कि उनके क्षेत्र के प्रतापपुर, नौसर, बंडिया, बंगाली कालोनी, मेहरबान नगर पूरी तरह पानी मे डूबे हुए हैं। वहां की आबादी 24 घण्टे से पानी के बीच दहशत में उम्मीद की राह देख रही है।

ट्रैक्टर से पीड़ितों के पास पहुंचे

धामी ने लाव-लश्कर छोड़ तत्काल ट्रैक्टर मंगवाया और उस पर सवार हो बिना किसी सुरक्षा के प्रतापपुर की ओर रवाना हो गए। झुग्गी-झोपड़ी में पानी के बीच बैठे परिवारों की हालत देख वह इतने भावुक हो गए कि ट्रैक्टर से उतर धरा का पानी चीरते हुए झुग्गी में जा पहुंचे। कभी विधायक मगर आज मुख्यमंत्री के रूप में होने के बाद भी उनको उसी सामान्य रूप में अपने बीच पाकर दहशतजदा गरीबों के चेहरों पर मुस्कान दिखाई दी। धामी भी उसी आत्मीयता से मिले और बच्चों को दुलारते हुए परेशान न होने की बात कही। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से कह दिया गया है। जल्द ही आपदा के घाव भर जाएंगे। जो भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई सरकार करेगी। सीएम ने करीब 15 किलोमीटर का सफर टैक्ट्रर से ही तय किया। 

फसलों के मुआवजे को सीएम को सौंपा ज्ञापन

भारतीय किसान यूनियन ने मुख्यमंत्री धामी को ज्ञापन सौपा। जिसमें उन्होंने बाढ़ से धान, गन्ने को हुए नुकसान का सर्वे कर 50 हजार प्रति एकड़ मुआवजा दिए जाने की मांग की। क्रय केंद्रों पर नमी काटकर तौल कराने, पैमेंट कराने, नानकसागर डैम का पानी अचानक खोले जाने के कारण आसपास गांवों में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई। ऐसे दोषी कर्मियों के विरुद्घ कार्रवाई करने की मांग की। 

Edited By: Prashant Mishra