जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़ : शीतकाल में सीमांत जिले की सबसे महत्वपूर्ण थल-मुनस्यारी सड़क पर संपर्क बनाए रखना बड़ी चुनौती है। शीतकाल में जगह-जगह क्षतिग्रस्त सड़क को यातायात के लिए सुचारू रखना लोक निर्माण विभाग के लिए आसान नहीं हो रहा। बर्फबारी होने पर संकरी सड़क पर यातायात करीब ठप हो जा रहा। बीते एक सप्ताह से यहां यातायात बुरी तरह से प्रभावित है।

यह सड़क चीन सीमा को जोड़ती है। इसी रास्ते चीन सीमा पर सेना व आइटीबीपी कैंपों तक जवान और सामान भेजे जाते हैं। इसी से सेना और अद्र्धसैनिक बलों की निरंतर आवाजाही होती है। स्थानीय लोग लंबे समय से इसके चौड़ीकरण की मांग कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका। मानसून काल में करीब चार माह यह सड़क प्रतिदिन घंटों बंद रहती है। बर्फबारी के समय भी यही हाल होता है। इससे मुनस्यारी में खाद्यान्न, गैस सहित आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति ठप हो जाती है। जौलजीबी होकर छोटे वाहनों से पहुंचे सामान की कीमत बढ़ जाती है।  

71 किमी मार्ग में आठ स्थान खतरनाक 

थल से मुनस्यारी 71 किमी सड़क में पांच स्थान पहले से ही खतरनाक बने थे । 2021 के मानसून काल में तीन और स्थल खतरनाक हो गए। गिरगांव से गिनी और वनिक के बीच तो हालत दयनीय है।  

सबसे अधिक पर्यटक, फिर भी बुरा हाल  

पिथौरागढ़ जिले में सबसे अधिक पर्यटक मुनस्यारी पहुंचते हैं। अब तो हालत यह है कि साल भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन मार्ग अभी भी ङ्क्षसगल और खतरनाक ही बना हुआ है।  कालामुनि से लेकर मुनस्यारी तक मार्ग लगभग नौ हजार फीट से 7200 फीट तक की ऊंचाई पर है। इसी क्षेत्र में बर्फ से मार्ग बंद होता है। लोडर मशीन से प्रतिवर्ष बर्फ हटाने से मार्ग दलदल बन चुका है।

लोनिवि डीडीहाट के सहायक अभियंता तारा सिंह का कहना है कि थल-मुनस्यारी मार्ग के चौड़ीकरण के लिए छह करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शासन से स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ हो जाएगा। लोनिवि का प्रयास मार्ग को हमेशा सुचारू रखने का है। बर्फ हटाने के लिए स्नो कटर और लोडर मशीन दोनों तरफ तैनात की है।

Edited By: Prashant Mishra