नैनीताल, जेएनएन : हाई कोर्ट से सितारगंज कोतवाली में तैनात रहे दरोगा समेत पांच पुलिस कर्मियों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने लोकायुक्त के आदेश पर पुलिस कर्मियों पर दर्ज प्राथमिकी, निचली कोर्ट में दायर चार्जशीट व सम्मन आदेश को भी निरस्त कर दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद लोकायुक्त द्वारा इस मामले में जारी आदेश सवालों में घिर गया है।

दरअसल, 14 अगस्त 2006 को सितारगंज कोतवाली के तत्कालीन कोतवाल जीबी पांडे द्वारा खलील अहमद निवासी सितारगंज व शाहिद उर्फ गुड्डू के के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस के अनुसार जब एसआइ उमेद सिंह दानू, सिपाही मतलूब हुसैन, रतन सिंह गिल, विपिन कुमार, अरुण सैनी व चालक प्रेम सिंह गश्त पर थे। पीलीभीत से आ रही टवेरा कार संख्या यूपी-30ए, 2586 रोकी। उसे खलील चला रहा था। जांच पड़ताल में वह हरियाणा से चोरी निकली। आरोपित की निशानदेही पर अन्य चोरी की कारें भी बरामद हुई। 14 फरवरी 2007 को जिला जज नैनीताल की कोर्ट ने आरोपित खलील के खिलाफ धारा-420, 467, 468, 471, 411 आइपीसी तथा गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज केस का संज्ञान लिया। दिसंबर 2007 में खलील द्वारा तत्कालीन लोकायुक्त एसएचए रजा के समक्ष शिकायत दर्ज की। मुझे झूठा फंसाया गया है। लोकायुक्त द्वारा 14 दिसंबर 2007 को मामले की जांच कराई और पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश पारित किया। 18 जनवरी 2009 को पुलिस कर्मियों के खिलाफ सितारगंज कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर दिया। आठ फरवरी 2009 को पुलिस ने सीजेएम ऊधमसिंह नगर कोर्ट में तत्कालीन दरोगा उमेद व अन्य के खिलाफ 342, 465, 466, 468 व 479 व 470 आइपीसी के तहत चार्जशीट दायर की। सीजेएम कोर्ट ने 16 नवंबर 2009 को मुकदमे का संज्ञान हुए पुलिस कर्मियों के खिलाफ सम्मन जारी कर दिए।

दरोगा उमेद सिंह समेत अन्य पुलिस कर्मियों ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी, कोर्ट में दाखिल चार्जशीट, सम्मन आदेश को हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी। पुलिस कर्मियों की ओर से अधिवक्ता विपुल शर्मा ने बहस करते हुए कहा कि मामले में पुलिस कर्मियों को झूठा फंसाया गया था। यह मुकदमा चलने योग्य ही नहीं था। न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ ने मामले को सुनने के बाद कहा कि समकक्ष मुकदमे एक साथ नहीं चल सकते। पुलिस कर्मियों ने आधिकारिक ड्यूटी के तहत आरोपित खलील को गिरफ्तार किया था। एकलपीठ ने माना कि 197 सीआरपीसी के अंतर्गत सरकार द्वारा पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं ली गई। एकलपीठ ने निचली कोर्ट में दायर चार्जशीट, सम्मन आदेश व प्राथमिकी को निरस्त कर दिया।

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Posted By: Skand Shukla

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