काशीपुर, अभय पांडेय : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य महिला आयोग में तीन महिलाओं को दायित्व के साथ ही राज्य मंत्री का दर्जा दिया है। जिसमें से एक नाम काशीपुर के शायरा बानो (Shayara bano)  का भी है। तीन तलाक के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने वाली काशीपुर की शायरा अपने संघर्ष के बूते आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। त्रिवेन्द्र सरकार में बतौर राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद शायरा ने कहा कि वह बीजेपी की एक छोटी सी कार्यकर्ता हैं। जिम्मेदारियों का पूरी गंभीरता से करूंगी। प्रदेश में हर पीडि़त महिला को न्याय मिल सके, इसके लड़ती रहूंगी। शायरा ने कहा पीएम मोदी के नेतृत्व में आज देश की महिलाएं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं। तीन तलाक कानून बनने से कुप्रथाओं को बढ़ावा देने वालों के मन में डर बना है।

 

शायरा का कहना है कि मैं ऐसे धर्म से हूं जहां महिलाओं को अपनी बात कहने की आजादी अमूमन घरों में नहीं मिल पाती है। जबकि मेरे माता-पिता ने हमेशा ही मेरी बातों का सुना और समझा है। जहां तक बात तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई की थी तो यह मात-पिता के सहयोग के बिना आसान नहीं होता। मेरे माता-पिता हमेशा मेरी शक्ति बने। रास्ते में अड़चने भी कम नहीं आईं। रूढ़िवादी ताकतों ने आवाज दबाने की भरसकर कोशिश की। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। कानूनी लड़ाई लड़ने के साथ ही मुस्लिम संगठनों और पर्सनल लॉ बोर्ड के तरफ से केस वापस लेने का दवाब भी दिया गया। लेकिन मेरे पिता इकबाल कादरी हमेश मेरे साथ ढाल की तरह खड़े रहे।

 

ससुराल में जो दर्द झेला नहीं भूलूंगी

शायरा बतातीं हैं कि पिता इकबाल कादरी काशीपुर में आर्मी के डिपो में रहे। मैंने समाजशास्त में पहले एमए किया था। फरवरी 2016 में वह पहली महिला बनीं, जिन्होंने तीन तलाक, बहुविवाह और हलाला पर बैन लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। शायरा की शादी 2002 में इलाहाबाद के एक प्रॉपर्टी डीलर से हुई थी। शायरा का आरोप था कि शादी के बाद उन्हें हर दिन पीटा जाता था। पति हर दिन छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करता था। टेलीग्राम के जरिए तलाकनामा भेजा। वे एक मुफ्ती के पास गईं तो उन्होंने कहा कि टेलीग्राम से भेजा गया तलाक जायज है।

 

हलाला को भी सायरा ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

शायरा बानो ने सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला के रिवाज को भी चुनौती दी। इसके तहत मुस्लिम महिलाओं को अपने पहले पति के साथ रहने के लिए दूसरे शख्स से दोबारा शादी करनी होती है। इस मुहिम में सर्वोच्च न्यायालय में उनकी जीत ने लाखों मुस्लिम महिलाओं को कुप्रथा से मुक्ति दिलाने का काम किया। तीन तलाक केस की वजह से पढ़ाई आगे नहीं जारी रख सकीं। इस लड़ाई को जीतने के बाद उन्होंने इस वर्ष एलएलबी में दाखिला लिया है। अब वह ऐसी महिलाओं की काउंसलिंग भी करती हैंं जो किसी वजह से परेशान हैं या उनकी जिंदगी में कुप्रथाओं की वजह से दिक्कत है। कहती हैं कि मेरी कोशिश होती है कि असहाय और गरीब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करूं।

 

बीजपी ने पूरे संघर्ष में दिया साथ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल में अल्पसंख्यक वर्ग के हित में कई बड़े फैसले लिए हैं जिसके परिणाम सुखद नजर आ रहे हैं। तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने से महिलाओं को अपनी पहचान और अधिकार मिला है, जिसके लिए हम सरकार के आभारी हैं। शायरा ने प्रदेश के मुखिया त्रिवेन्द्र रावत व प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत को आभार जताते हुए कहा कि मेरे जैसे पार्टी कार्यकर्ता को अहम जिम्मेदारी दी गई है, जिसे मैं पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश करूंगी । मेरा प्रयास होगा कि पीएम मोदी की सोच को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में हर महिला को उसके अधिकार और उसकी सुरक्षा के लिए प्रयास कर सकूं।

 

जागरण का जताया आभार

तीन तलाक मुहिम के संघर्ष से लेकर बीजेपी में पार्टी की ज्वाइनिंग तक दैनिक जागरण की तरफ से मिले सहयोग के प्रति सायरा ने जागरण का आभार जताया। शायरा ने कहा है कि जागरण मेरी हर लड़ाई में मेरे साथ खड़ा रहा है । महिलाओं के साथ होने वाले हर अन्याय में जागरण पीडि़त महिलाओं के लिए कवच बनकर काम करता रहा है। आगे भी यह सहयोग मिलता रहेगा यही उम्मीद है।

 

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