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कल आसमान में होगी रोमांचक खगोलीय घटना, चंद्रमा के पहलू में ओझल हो जाएगा खूबसूरत शुक्र

Published: Sun, 13 Sep 2026 11:06 AM (GMT+05:30)

सोमवार को एक रोमांचक खगोलीय घटना होगी, जिसमें शुक्र ग्रह कुछ समय के लिए चंद्रमा के पीछे छिप जाएगा।

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समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

रमेश चंद्रा, नैनीताल। सोमवार की सांझ ढले रोमांचक खगोलीय घटना होने जा रही है। इस घटना में सौर मंडल के सर्वाधिक खूबसूरत ग्रहों का संगम होने जा रहा है। वीनस यानी शुक्र ग्रह कुछ लम्हों के लिए चंद्रमा के पहलू में खुद को छिपा लेगा। भारत के कई हिस्सों से इस खगोलीय घटना को नग्न आंखों से देखा जा सकेगा।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ खगोल विज्ञानी डा शशिभूषण पांडेय ने बताया कि चंद्रमा की सुंदरता किस्से कहानियों में अछूते नहीं हैं तो मुस्कुराते हुए वीनस भला कब किसकी आंखों से ओझल हुआ है।

शुक्र की दीवानगी कम नहीं

शाम के असमान की सुंदरता बिखेरने वाले शुक्र की दीवानगी कम नहीं, जो प्राचीनकाल से कभी सुबह तो कभी शाम के आसमान में अपनी दमक बिखेरता आ रहा वीनस समय का निर्धारित सूचक माना जाता रहा है।

इन दिनों भी इसे बिना किसी यंत्र के सांझ ढलने के बाद नग्न आंखों से देखा जा सकता है। मगर अब शुक्र 14 सितंबर की शाम को कुछ पल को चंद्रमा की ओट में ओझल होने जा रहा है। वैज्ञानिकों का अनुसार यह रोमांचक खगोलीय घटना होगी। इस घटना में सांझ के समय करीब 12 प्रतिशत नजर आ रहा चंद्रमा अनोखी छटा में बिखेर रहा होगा।

इस बीच शुक्र ग्रह आसमान से उतरता हुआ चंद्रमा के पीछे जा छिपेगा। कुछ पल छिपे रहने के बाद चंद्रमा के दूसरे छोर से बाहर निकल आएगा। यह एक तरह से ग्रहण जैसी घटना होगी, जिसे लूनर अकल्टेशन आफ वीनस की घटना कहा जाता है। भारत के कुछ हिस्सों में खासकर दक्षिण में शुक्र को चंद्रमा के पीछे छिपते देखा जा सकेगा। इस घटना को सांझ ढलने के बाद नग्न आंखों से देखा जा सकेगा।

आभासीय दूरी के नाते दिखाई देंगे एक दूसरे के करीब

नैनीताल: डा शशिभूषण पांडेय के अनुसार यह खगोलीय घटना अलग अलग स्थानों में अलग अलग समय में देखी जा सकेगी। अकल्टेशन की घटना दक्षिण भारत व मध्य व पश्चिम भारत में बखूबी देखी जा सकेगी, जबकि पश्चिमोत्तर भारत में दोनों अगल बगल में नजर आएंगे।

इस घटना चंद्रमा और शुक्र की युति कहा जाएगा। पृथ्वी से देखे जाने पर दोनों के बीच आभासीय दूरी के नाते एक दूसरे करीब होंगे, जबकि वास्तविकता में दोनों के बीच करोड़ों किमी की दूरी होगी।