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गौला पुल से शुरू हुई बनभूलपुरा की कहानी, 10 साल से चल रहा केस... दांव पर 27 हजार सपनें

Published: Wed, 09 Sep 2026 09:50 AM (IST)

बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है, जो 27 हजार लोगों के भविष्य को प्रभावित करेगा। ...और पढ़ें

बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले पर सुप्रीम कोर्ट में नौ सितंबर को सुनवाई.

बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले पर सुप्रीम कोर्ट में नौ सितंबर को सुनवाई.

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जागरण संवाददाता, हल्द्वानी । बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामला में आज बुधवार को सुप्रीम सुनवाई होनी है। साल 2013 में 13 साल पहले गौला पुल के गिरने के कारणों की जांच से शुरू हुआ यह मामला 27 हजार लोगों के भविष्य पर टिका है। रेलवे के दावे अनुसार बनभूलपुरा क्षेत्र में उनकी 31 हेक्टेयर भूमि है, जिस पर अतिक्रमण है। इस अतिक्रमण को हटाने को लिए 10 वर्षों से यह केस न्यायालयों में चल रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने बनभूलपुरा बनाम रेलवे अतिक्रमण मामले में 24 फरवरी 2026 को सुनवाई में जिला प्रशासन व रेलवे से स्थानीय लोगों के पुर्नावास के लिए पीएम आवास योजना का लाभ देने को कहा था।

वहीं बनभूलपुरा वासियों के फार्म भरवाकर उन्हें सुप्रीम कोर्ट को दिया गया। इस मामले में 23 जुलाई को सुनवाई होनी थी, लेकिन किसी कारणवश सुनवाई न हो पाई। अब नौ सितंबर यानी आज इस अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है।

इसे लेकर रेलवे अधिकारियों ने अपनी तैयारियां पूरी की है। हल्द्वानी व काठगोदाम रेलवे स्टेशन के साथ ही अन्य रेलवे स्टेशनों से फोर्स मंगवाई जाने की आशंका है। हालांकि इस संबंध में रेलवे के बड़े अधिकारी कुछ कहने से बच रहे हैं। हालांकि रेलवे का दावा है कि बनभूलपुरा की 31 हेक्टेयर अतिक्रमण वाली भूमि मिलने से हल्द्वानी रेलवे स्टेशन का काफी विस्तार हो सकता है।

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अतिक्रमित क्षेत्र में बने 3660 घर, 27 हजार लोग करते वास

-रेलवे के दावों के अनुसार बनभूलपुरा क्षेत्र की अतिक्रमित भूमि पर 3660 घर बने हैं, जिनमें लगभग 27 हजार लोग निवास करते हैं। इस क्षेत्र में चार मदरसे और 21 धार्मिक स्थल भी हैं, जिनमें अधिकांश मस्जिदें और कुछ मंदिर शामिल हैं। रेलवे के अनुसार उसकी करीब 31 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण हुआ है।

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