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कराटे फेडरेशन के विवाद में एशियन गेम्स के लिए नहीं मिला अपना कोच, सरकारी पर भी संशय

Published: Sat, 12 Sep 2026 02:54 PM (GMT+05:30)

कराटे फेडरेशन के विवाद के चलते एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों को अपने कोच साथ ले जाने की अनुमति नहीं ...और पढ़ें

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ललित मोहन बेलवाल, हल्द्वानी। कराटे में फेडरेशन के विवाद का खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ रहा है। एशियन गेम्स के लिए चयनित हल्द्वानी के चेतन भट्ट और हरियाणा की अलीशा चौधरी को इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (आइओए) से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी अपना कोच ले जाने की अनुमति नहीं मिली है और न ही अब तक सरकारी कोच मिलने की जानकारी दी गई है। एशियन गेम्स शुरू होने में महज एक सप्ताह का समय बचा है। दोनों को 15 सितंबर को रवाना होना है।

एशियन गेम्स में 84 किलो भारवर्ग में चेतन और 55 किलो में अलीशा दावेदारी पेश करेंगी। चूंकि कराटे में अलग-अलग संगठनों ने खुद के नेशनल फेडरेशन होने का दावा किया इसलिए आइओए ने किसी भी संगठन को फेडरेशन की मान्यता नहीं दी है। अब मान्यता के अभाव में खिलाड़ियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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यही वजह है कि एशियाई कराटे चैंपियनशिप के आधार पर एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले दोनों खिलाड़ियों का जापान जाना तय नहीं था। बाद में खेल मंत्रालय में मामला पहुंचने के बाद उन्हें अगस्त में एशियन गेम्स में जाने की मंजूरी मिली। लेकिन दोनों ही खिलाड़ियों को अपना कोच ले जाने की अनुमति नहीं मिली है।

चेतन भट्ट ने बताया कि उन्होंने अपने कोच वीरेंद्र राठौर को साथ ले जाने के लिए आइओए को कई मेल किए हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। दरअसल, अपना कोच ले जाने के लिए खिलाड़ी फेडरेशन के माध्यम से आइओए से गुहार लगाते हैं, लेकिन कराटे में कोई फेडरेशन है ही नहीं तो खिलाड़ियों की सुनवाई नहीं हो रही है।

टीम लीडर तय लेकिन कोच का पता नहीं
चेतन भट्ट ने बताया कि उनके साथ जापान जाने के लिए टीम लीडर तय हो गया है, लेकिन अभी कोच के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है। अगर उनके साथ कोच नहीं जाते हैं तो यह इन खिलाड़ियों के साथ अन्याय होगा। क्योंकि टीम लीडर बतौर कोच मैट पर नहीं बैठ सकता है। ऐसे में वह खिलाड़ी के लिए रिव्यू लेने का भी अधिकारी नहीं होता है।

नए कोच के साथ तालमेल बैठाने में होगी परेशानी
चेतन भट्ट ने बताया कि नया कोच मिलेंगे या नहीं, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि खेल विशेषज्ञ बताते हैं कि आइओए इन खिलाड़ियों के साथ कोच या कोई सपोर्टिंग स्टाफ जरूर भेजेगा। अचानक नया कोच मिलने से अक्सर खिलाड़ियों को उनके साथ तालमेल बैठाने में परेशानी होती है। मैदान पर रणनीति को लेकर भ्रम की स्थिति बनती है। खास तौर पर दबाव वाले क्षणों में एक-दूसरे को समझने में कठिनाई होती है। इसका सीधा असर खिलाड़ी के प्रदर्शन पर पड़ता है।