नैनीताल, जेएनएन : हाई कोर्ट ने आदेश का मनमाना क्रियान्वयन कर सितारगंज में सड़क चौड़ीकरण के बहाने आवासीय व व्यावसायिक भवनों को तोडऩे को बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने इस मामले में ऊधमसिंह नगर के डीएम नीरज खैरवाल, सितारगंज की एसडीएम निर्मला बिष्ट, लोनिवि के अधिशासी अभियंता केके तिलारा को अवमानना नोटिस जारी किया है। आदेश का गलत प्रयोग करने पर उन्हें दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई दो जनवरी को होगी।

इस प्रकार से समझें मामला

वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ में सितारगंज निवासी अधिवक्ता दयानंद व दो अन्य लोगों की अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। उनका कहना था कि पूर्व में कोर्ट ने राज्य में सार्वजनिक स्थानों, गलियों व सड़कों के अतिक्रमण को चिह्निïत करने के लिए जिलास्तर पर कमेटियां गठित करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए थे। कमेटियों को तीन माह के भीतर प्रदेश में अतिक्रमण चिह्निïत कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करनी थी। कमेटी में राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी शामिल करने को कहा था। आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा कोर्ट के आदेश की अनदेखी करते हुए सितारगंज में रोड के चौड़ीकरण के नाम पर आवासीय व व्यवसायिक दुकानों को तोड़ा जा रहा है। विरोध करने पर हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है। जबकि कोर्ट ने अपने आदेश में साफ लिखा है कि प्रदेश में कहीं अतिक्रमण हुआ है तो इसकी जांच करके रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने डीएम ऊधमसिंह नगर समेत अन्य को अवमानना नोटिस जारी किया है।

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Posted By: Skand Shukla

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