किशोर जोशी, जेएनएन : dada saheb phalke सम्‍मान इस बार सदी के महानायक amitabh bachhan को मिलने की घोषण के बाद से फिल्‍म इंडस्‍ट्री से लेकर उनके फैन्‍स तक में खुशी की लहर है। हर काेई अपने अपने तरीके से विश कर रहा है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं amitabh bachhan का नैनीताल से गहरा लगाव रहा है। उनकी बुनियादी शिक्षा यहां के प्रतिष्ठित शेरवुड कॉलेज से ही हुई है। यहां से सीनियर सेकेंडरी पास मेगास्टार amitabh bachhan के अभिनय की बुनियाद इसी विद्यालय में पड़ी थी। amitabh bachhan ने इस विद्यालय में दो साल (1958-1959) अध्ययन किया था। महानायक को दादा साहब फाल्के अवार्ड की घोषणा से शेरवुड स्कूल ही नहीं नैनीताल भी खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। 

करोडों भारतीय के दिलों पर राज करने वाले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन 2008 में पत्नी जया बच्चन, बेटे अभिषेक बच्चन, बहू ऐश्वर्या बच्चन व पारिवारिक दोस्त अमर सिंह के साथ नैनीताल आए थे। कॉलेज की आेर से उनके शिक्षा ग्रहण करने के 50 साल पूरे होने पर खास तौर पर वार्षिकोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि बुलाया गया था। तब वह तीन दिन तक नैनीताल में ठहरे और पूरे समय वार्षिकोत्सव के कार्यक्रमों का लुत्फ उठाया। साथ ही कार्यक्रमों के विजेताओं को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया। तब amitabh bachhan ने कहा था कि आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसका श्रेय शेरवुड कॉलेज की शिक्षा व अनुशासन को जाता है। अमिताभ ने स्वच्छता अभियान के तहत आयोजित न्यूज चैनल के कार्यक्रम में तथा हालिया कौन बनेगा करोड़पति में साफगोई से नैनीताल की स्कूली शिक्षा के दौरान के अनुभव भी दर्शकों के साथ साझा किये। इसमें उन्होंने स्कूल के दिनों में चुपचाप मल्लीताल में समोसे खाने का भी जिक्र किया। 

amitabh bachhan जब हो गए थे बीमार

नैनीताल में अभिनय की पहली पाठशाला के दौरान नाटक का मंचन होना था तो अचानक अमिताभ बीमार पड़ गए। तब उनके पिता महान कवि हरिवंश राय बच्चन ने 'मन का हो तो अच्छा, मन का ना हो तो और भी अच्छा' कविता कह उन्हें समझायी। इस कविता का अमिताभ के जीवन में गहरा प्रभाव पड़ा। अमिताभ ने अपने ब्लॉग में भी इसका जिक्र किया। 

शेरवुड मनाएगा dada saheb phalke सम्‍मान मिलने का जश्न 

शेरवुड स्कूल के प्रधानाचार्य अमनदीप संधू ने अमिताभ को दादा साहब फाल्के अवार्ड मिलने को सिने जगत के साथ ही शेरवुड, नैनीताल के लिए गौरवशाली बताया। कहा कि उनकी दीर्घायु व स्वस्थ जीवन के लिए गिरिजाघर में प्रार्थना होगी और जश्न मनाया जाएगा। 

दादा साहेब फाल्‍के के नाम पर दिया जाता है सम्‍मान 

जब भी हिन्दी सिनेमा के शुरुआती दौर की बात होती है, तो दादासाहब फाल्के का नाम सबसे पहले लिया जाता है। वो एक जाने-माने प्रड्यूसर, डायरेक्टर और स्क्रीनराइटर थे जिन्होंने अपने 19 साल लंबे कॅरियर में 95 फिल्में और 27 शॉर्ट मूवी बनाईं। कम लोग ही जानते हैं कि दादा साहेब फाल्के का असली नाम धुंधिराज गोविन्द फाल्के था। उन्‍हीं के नाम पर हिन्‍दी सिनेगा का सबसे बड़ा सम्‍मान दादा साहेब फाल्‍के दिया जाता है। 

दादा साहेब फाल्‍के ने बनाई थी भारत की पहली फीचर फिल्‍म 

दादा साहब फाल्के ने ‘राजा हरिश्चंद्र’ से डेब्यू किया जिसे भारत की पहली फुल-लेंथ फीचर फिल्म कहा जाता है। बताया जाता है कि उस दौर में दादा साहब फाल्के ने ‘राजा हरिश्चंद्र’ का बजट 15 हजार रुपये था, उस समय में उन्हें कोई महिला कलाकार नहीं मिली, जिसकी वजह से फिल्म में राजा हरिश्चंद्र की पत्नी का किरदार एक आदमी ने ही निभाया। राजा हरिश्चचंद्र भारत की पहली फुल लेंथ फीचर फिल्म रही, जिसे उन्होंने 1913 में छह महीने 27 दिन में बनाया। इसके बाद फाल्के ने मोहिनी भस्मासुर और सत्यवान सावित्री फिल्में बनाई जो दर्शकों को खूब पसंद भी आई। मोहिनी भस्मासुर पहली फिल्म रही जिसमें महिला कलाकारों ने भारतीय सिनेमा में पहली बार काम किया।

Posted By: Skand Shukla

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