लालकुआं, जागरण संवाददाता : अखिल भारतीय किसान महासभा ने शहीद स्मारक कार रोड बिंदुखत्ता, लालकुआं में एकदिवसीय धरना दिया। जिसमें व्यापक पैमाने पर किसानों की भागीदारी हुई। धरने की शुरुआत किसान आंदोलन में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। धरने के माध्यम से मांग की गई कि मोदी सरकार तत्काल प्रभाव से किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने के लिए संसद का आपातकालीन सत्र बुलाए। क्योंकि यह कानून असंवैधानिक तरीके से संसद से पारित किए गए हैं, जबकि कृषि राज्यों का विषय है। इसलिए यह भारत के संघीय ढांचे पर भी हमला है।

 

एकदिवसीय धरना को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के उत्तराखंड राज्य सचिव राजा बहुगुणा ने कहा कि, "इतने लंबे समय से किसानों का आंदोलन चल रहा है कई किसान शहीद हुए हैं लेकिन मोदी सरकार का रुख बहुत ही उदासीन व आपत्तिजनक है। जब से मोदी सरकार आयी है तब से लगातार इस सरकार ने संविधान को ताक पर रखकर लोकतंत्र विरोधी फैसले लेते हुए देश को एक नए कंपनी राज की ओर धकेल दिया है। लेकिन इस किसान आंदोलन ने अंबानी-अडानी के नेतृत्व में चल रहे कंपनी राज के रथ पर लगाम लगाई है। इस ऐतिहासिक किसान आंदोलन ने देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने की उम्मीदों को जिंदा कर दिया है। इस आंदोलन को व्यापक बनाया जाना राष्ट्रहित में बहुत जरूरी है।"

 

किसान महासभा के जिलाध्यक्ष बहादुर सिंह जंगी ने कहा कि, "मोदी सरकार के कृषि कानून कारपोरेट के मुनाफे और किसानों को बर्बाद करने वाले कानून हैं।" उन्होंने कहा कि, "सरकार वार्ता तथा किसानों की समस्या को हल करने के प्रति गम्भीर नहीं है। जैसे-जैसे सरकार के एमएसपी के आश्वासन की बात तेज हो रही है, धान के दाम गिरते जा रहे हैं, यह कौन सा जादू है? इससे साफ पता चलता है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार का आश्वासन धोखे के अलावा कुछ नहीं है और किसानों ने इस बात को पकड़ लिया है। इसीलिए किसान मांग कर रहे हैं कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जाय और फसल की खरीद की गारंटी सरकार ले।"

 

माले जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, "मोदी सरकार और भाजपा द्वारा किसान आंदोलन को बदनाम करने के हर प्रयास को विफल करते हुए किसान आंदोलन ने राष्ट्रव्यापी समर्थन हासिल कर लिया है। किसानों के आंदोलन के पक्ष में अन्य तबकों का समर्थन अभूतपूर्व है इसलिए मोदी सरकार किसान आंदोलन के सम्मुख लाचार हो गई है।"

 

धरने के माध्यम से मोदी सरकार की संवेदनहीनता पर रोष प्रकट करते हुए निंदा प्रस्ताव व वार्ता के नाम पर नाटक बंद करते हुए तत्काल अन्नदाताओं की मांग मानने का प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही तय किया गया कि मोदी सरकार द्वारा वार्ता का नाटक बंद करके किसान विरोधी कानून शीघ्र वापस न हुए तो किसान महासभा द्वारा पूरे तराई-भाबर में 'किसान यात्राएँ' चलाते हुए किसानों की बड़ी गोलबंदी की जायेगी।

 

एकदिवसीय धरने में मुख्य रूप से राजा बहुगुणा, बहादुर सिंह जंगी, डॉ कैलाश पाण्डेय, भुवन जोशी, आनंद सिंह सिजवाली, विमला रौथाण, ललित मटियाली,नैन सिंह कोरंगा, पुष्कर दुबड़िया, मदन धामी, गोविंद सिंह जीना,बिशन दत्त जोशी,प्रभात पाल, धीरज कुमार, हरीश राम, माधो राम, खीम सिंह, गोपाल गड़िया, कमलापति जोशी, स्वरूप सिंह दानू,किशन सिंह जग्गी, ललित जोशी, प्रोनोबेस करमाकर, त्रिलोक राम, डी एस मेहरा, हेमा देवी, शांति देवी, कमला देवी, रेखा देवी, मुश्ताक मियां, दीवान सिंह चौहान, पनी राम, बालम सिंह, दौलत सिंह कार्की, मोहन जोशी, रमेश भट्ट,मदन सिंह जग्गी, दीपक आदि शामिल रहे।

Edited By: Skand Shukla