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    कागजों में 2013 में ‘दफन’ पर असल में जिंदा अफजाल, फार्म में जो भाई बना वो भी कागजी

    Updated: Sun, 25 May 2025 10:41 AM (IST)

    बनभूलपुरा में जीवित अफजाल अली को कागजों में मृत दिखाया गया। कब्रिस्तान कमेटी ने 2013 में उसे दफ्न कर दिया और 2014 में फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया गया। प्रमाण पत्र में गलत सूचना देने वाले का नाम दर्ज है। पुलिस ने कब्रिस्तान कमेटी के दो सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। अफजाल अली हत्या के मामले में सजायाफ्ता है लेकिन जमानत पर बाहर है।

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    प्रमाणपत्र में सूचना देने वाले का नाम जरूरी, मगर असल वो शख्स है ही नहीं

    गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी। हत्या के मामले में सजायाफ्ता अफजाल अली को जिंदा होने के बावजूद किस तरह कागजों में मारने का खेल खेला गया। इसे लेकर कई चौंकाने वाली बातें और सामने आ चुकी है। आज की तारीख में भी खुले आसमान के नीचे घूम रहे अफजाल अली को कब्रिस्तान कमेटी ने 2013 में में ''दफ्न'' कर दिया था। कब्रिस्तान की रसीद के आधार पर नगर निगम से 2्र014 में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया गया।

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    प्रमाणपत्र तैयार करने के लिए भरे जाने वाले फार्म में मौत की सूचना देने वाले के लिए अपना नाम लिखना जरूरी होता है। अफजाल अली की फाइल में इस शख्स का नाम है अफजाल अली निवासी आजाद नगर थाना बनभूलपुरा। पढ़कर सीधा सवाल उठा कि क्या अफजाल खुद ही अपना झूठा मृत्यु सर्टिफिकेट बनाने के लिए निगम पहुंच गया था? मगर ऐसा नहीं है।

    दरअसल, इस अफजाल के आगे लिखा था मृतक का ''खलेला'' भाई। यानी मौसी का लड़का। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि इस नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं। यानी भाई भी ''कागजी'' निकला।

    शुक्रवार को फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने के खेल से जुड़े कब्रिस्तान कमेटी के दो लोगों पर पुलिस ने निगम की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज की थी। मामला तीन प्रमाणपत्र से जुड़ा था। जिसमें से दो की हल्द्वानी में मौत नहीं हुई। और न ही इन्हें यहां सुपुर्दे खाक किया गया। उसके बावजूद कमेटी ने कब्रिस्तान में दफ्न होने की रसीद जारी कर दी। जबकि तीसरा मामला बेहद गंभीर था।

    बनभूलपुरा थाना क्षेत्र निवासी अफजाल अली नाम के एक व्यक्ति पर 2012 में हत्या का मामला दर्ज होता है। सुनवाई के बाद उसे न्यायालय से उम्र कैद की सजा हो जाती है। इन दिनों सजा के विरुद्ध् अपील करने की वजह से वो जमानत पर जेल से बाहर है। यानी जिंदा है। लेकिन इसका मृत्यु प्रमाणपत्र भी निगम से जारी हो चुका है।

    पुलिस की अब तक की जांच कहती है कि जिंदा अफजाल को कब्रिस्तान कमेटी ने 20 दिसंबर 2013 को कागजों में दफ्न कर दिया। यहां से मिली रसीद के आधार पर शपथपत्र बनाने के बाद आवेदन किया गया। जिस पर 18 दिसंबर 2014 को इसकी मौत का सरकारी कागज भी जमा हो जाता है।

    कब्रिस्तान कमेटी ने पैसे लेकर झूठी रसीद दी थी। ताकि हल्द्वानी से गायब होने पर सभी को लगे कि हत्या के मामले में सजायाफ्ता अफजाल अब मर चुका है। इससे उसे भविष्य में जेल की हवा भी नहीं खानी पड़ती। लेकिन प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस जब धीरे-धीरे इस चर्चित मामले से पर्दा उठाने लगी तो निगम को किए आवेदन में जिस व्यक्ति ने गवाही दी कि अफजाल मर चुका है। हकीकत में ऐसा कोई व्यक्ति है ही नहीं। यानी एक नया फर्जीवाड़ा।

    रजिस्ट्रार, कर्मचारी औैर स्टांप विक्रेता भी देंगे जवाब

    जन्म हो या मृत्यु प्रमाणपत्र। इसे अंत में जारी रजिस्ट्रार ही करता है। मामले में 2014 में रजिस्ट्रार रहे अधिकारी से भी सवाल होंगे। उन तक पहुंचने से पहले फाइल किस-किस कर्मचारी के पास से होकर गुजरती है। उन्हें भी जवाब देना पड़ेगा।

    तहसील में किस स्टांप विक्रेता के प्रमाणपत्र बनवाने में लगने वाला शपथपत्र तैयार किया। विवेचक उसके पास भी पहुंचेगा। कड़ी दर कड़ी जांच आगे बढ़ने पर कई और लोग भी नप सकते हैं। क्योंकि, पुलिस ये मान चुकी है कि मामला अफजाल समेत तीन मामलों का ही नहीं। बल्कि हल्द्वानी में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार से जुड़े गिरोह इनसे पहले और इनके बाद भी फर्जीवाड़ा कर चुका है।

    तीन दिन बीतने पर एसडीएम के पास जाती अफजाल की फाइल

    कब्रिस्तान कमेटी ने 20 दिसंबर 2013 को अफजाल की मौत से जुड़ी रसीद दी। इसके बाद 18 दिसंबर 2014 को निगम ने सर्टिफिकेट जारी हो गया। यानी मौत को एक साल पूरा होने से तीन दिन पहले। अगर 20 दिसंबर 2024 के बाद निगम के पास फाइल पहुंचती तो मामला एसडीएम कार्यालय पहुंच जाता है। क्योंकि, एक साल ज्यादा पुराने मामले में राजस्व विभाग के सत्यापन के आधार पर ही निगम सर्टिफिकेट जारी करता है।

    फेफड़ों में बीमारी की वजह से बताई मौत

    प्रमाणपत्र बनवाने को भरे जाने वाले आवेदन फार्म में लोग स्वजन की मौत की वजह का जिक्र भी करते हैं। अफजाल को लेकर बताया गया कि फेफड़ों में किसी बीमारी के चलते उसकी मौत हुई थी। लेकिन ये अफजाल आज भी पूरी तरह फिट है। वहीं, एसओ नीरज भाकुनी ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। विवेचक घटना से संबंधित हर अधिकारी-कर्मचारी से पूछताछ करेगा।

    कमेटी के ज्यादातर सदस्यों की मौत, इकबाल सदर रह चुका

    पुलिस के अनुसार कब्रिस्तान कमेटी के पुराने सदस्यों में से अधिकांश की मौत हो चुकी है। मामले में आरोपित बनाए गया इकबाल अंसारी कमेटी का सदर रह चुका है। बुजुर्ग होने की वजह से बेटा तनवीर काम देखता है। लंबे समय तक कमेटी की नई कार्यकारिणी भी गठित नहीं की गई थी। कुछ समय पूर्व ही नई टीम बनाई गई है।