जागरण संवाददाता, चम्पावत : लोहाघाट सीट पर मुख्य मुकाबला अब भले ही भाजपा और कांग्रेस के बीच होने लगा है लेकिन राज्य बनने के बाद 2002 के पहले विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड क्रांति दल की लहर ने राष्ट्रीय दलों की चूलें हिला दी थी। हालांकि उक्रांद प्रत्याशी जीत नहीं पाए थे लेेकिन उन्होंने भाजपा और कांग्रेस को कड़ी टक्कर दी थी। 

पृथक उत्तराखंड राज्य की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले उत्तराखंड क्रांति दल ने राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में हुए चुनाव में लोहाघाट विधान सभा से एडवोकेट नवीन मुरारी को अपना प्रत्याशी बनाया था। तब कांग्रेस और भाजपा मुख्य मुकाबले में थी। उत्तराखंड बनने के बाद पूरे राज्य में उक्रांद ने दमखम के साथ चुनाव भी लड़ा। लोहाघाट की जनता में भी क्षेत्रीय दल उक्रांद के प्रति भावनात्मक लगाव था। तेज तर्रार और बेदाग छवि के नवीन मुरारी को टिकट मिलने के बाद जनता का जोश दोगुना हो गया था। मतदान से पूर्व तक उक्रांद की जबर्दस्त हवा दिख रही थी, लेकिन मतदान आते-आते सब कुछ बदल गया।

कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र ङ्क्षसह माहरा ने चुनाव जीत लिया। उन्हें 7,648 वोट पड़े। भाजपा के कृष्ण चंद्र पुनेठा ने 7,138 वोट लेकर दूसरा स्थान प्राप्त किया और उक्रांद के नवीन मुरारी ने 6609 मतों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गए। इस चुनाव की खास बात यह रही कि तब बसपा प्रत्याशी और वर्तमान में भाजपा के सीङ्क्षटग विधायक पूरन ङ्क्षसह फत्र्याल चौथे स्थान पर रहे थे।

वर्तमान में चम्पावत के सीङ्क्षटग विधायक कैलाश गहतोड़ी ने भी यहां से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। गहतोड़ी को 2,776 वोट पड़े थे और वे पांचवे स्थान पर रहे थे। चुनाव में निर्दलीय समेत चुनावी मैदान में 13 प्रत्याशियों ने दम ठोंका था। इस चुनाव के बाद लोहाघाट सीट पर उक्रांद लगातार हाशिये पर जाती रही। इस बार उत्तराखंड क्रांति दल ने फिर से पूरे जोश खरोश के साथ चुनाव लडऩे का निर्णय लिया है। लेकिन हालात यह हैं कि उक्रांद को इस सीट से प्रत्याशी नहीं मिल पा रहे हैं। माना जा रहा है कि उक्रांद यहां से किसी राज्य आंदोलनकारी को अपना टिकट दे सकती है। 

Edited By: Prashant Mishra