हल्द्वानी, जेएनएन : महानगर की पांच लाख की आबादी में से आधी आबादी नलकूपों पर निर्भर है। नलकूपों के खराब होने पर लोगों को कई दिनों तक जलसंकट से जूझना पड़ता है। वहीं नलकूपों की मरम्मत में ही अकेले जलसंस्थान सालाना 60 लाख रुपये से अधिक खर्च कर दे रहा है। लगातार नलकूपों की मोटर मरम्मत करने के बावजूद शहर की पेयजल व्यवस्था कभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आ पाती है।

जलसंस्थान के हल्द्वानी नगरीय डिवीजन में 62 नलकूपों व ग्रामीण डिवीजन(लालकुआं) में 21 नलकूपों से जलापूर्ति होती है। शहर से लेकर ग्रामीण डिवीजन के नलकूप साल भर खराब होते हैं। रिकार्ड बताते हैं कि शहर डिवीजन हर साल नलकूप मरम्मत में करीब 40 लाख रुपये व ग्रामीण डिवीजन 20 लाख रुपये खर्च करता है। नलकूप फुंकने पर पाइप व मोटर निकालने और सही मोटर डालकर पाइप जोडऩे में कम से कम सप्ताह भर का समय लग जाता है। इस दौरान जलसंस्थान को पेयजल लाइनों को दूसरे नलकूपों की लाइनों से जोड़कर व टैंकरों से पानी बांटकर वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है। इसके बावजूद लोग निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर होते हैं।

 

टैंकरों में भी खर्च हो रहा सालाना 50 लाख

जलसंस्थान का नगर डिवीजन के पास सात विभागीय टैंकर हैं। वहीं अगर एक से अधिक नलकूप फुंक गए तो इन टैंकरों से पानी की वैकल्पिक व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है। मजबूरन विभाग को निजी टैंकरों को हायर कर पानी बंटवाना पड़ता है। जलसंस्थान के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक नगर डिवीजन का टैंकर से पानी बंटवाने में हर माह सवा लाख रुपये खर्च हो जाता है। गर्मियों में पानी की डिमांड बढऩे और नलकूपों की फुंकने की स्थिति में किराये पर भी टैंकर लेकर पानी बंटवाया जाता है। निजी टैंकरों से पानी बंटवाने में भी सालाना 20 लाख रुपये खर्च आ जाता है। वहीं ग्रामीण डिवीजन के पास अब तक अपना कोई टैंकर नहीं है। इस डिवीजन के अधीन नलकूपों के खराब होने पर निजी टैंकर हायर करना महकमे की मजबूरी है। ग्रामीण डिवीजन हर माह पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए टैंकर हायर करने में एक लाख रुपये तक खर्च कर रहा है।

 

सिंचाई विभाग के नलकूप मरम्मत में बजट का रोना

सिंचाई विभाग के नलकूप खंड हल्द्वानी के पास 191 नलकूप हैं। इनमें अधिकांश नलकूप पेयजल व्यवस्था से भी जुड़े हैं। सिंचाई के साथ ही इन नलकूपों को पेयजल लाइनों से भी जोड़ा गया है। महकमे के अफसरों के मुताबिक अक्सर चार से पांच नलकूप खराब रहते हैं। इस साल नलकूपों की मरम्मत के लिए डिवीजन की ओर से 3.57 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। लेकिन अब तक डिवीजन को केवल 35 लाख रुपये ही दिया गया है। ऐसे में नलकूप मरम्मत करने वाले ठेकेदार का भी लगातार दबाव बना रहता है।

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