जासं, हल्द्वानी : स्वैप योजना के तहत लगाए गए नलकूपों के जल संस्थान को हस्तांतरित होने के बाद ऑपरेटरों को मिलने वाले मानदेय में अंतर आने का मामला तूल पकड़ चुका है। ऑपरेटरों ने कोटाबाग से लेकर चोरगलिया तक के 33 नलकूपों का संचालन ठप कर दिया है। इससे सैकड़ों गांवों में सिंचाई व पेयजल का संकट पैदा हो गया है। वहीं नलकूपों का संचालन बंद होने से जलसंस्थान अफसरों के पसीने छूटने लगे हैं। अब अफसर ऑपरेटरों को मनाने की कोशिशों में जुट गए हैं।

दीपावली पर्व से पहले गौलापार के एक नलकूप ऑपरेटर ने नलकूप का संचालन बंद कर दिया था। उसका आरोप था कि स्वैप योजना के तहत उन्हें पांच हजार रुपये मानदेय दिया जाता था, जबकि अब जलसंस्थान मात्र 2650 रुपये मासिक भुगतान कर रहा है। उसने कम मानदेय लेने से इन्कार कर नलकूप का संचालन बंद कर दिया। धीरे-धीरे ये मामला तूल पकड़ने लगा और चोरगलिया, गौलापार, कोटाबाग, हल्द्वानी ग्रामीण के अन्य ऑपरेटरों ने भी श्रम कानून के मानकों के हिसाब से न्यूनतम मानदेय देने की मांग मुखर कर दी है। इससे हल्द्वानी डिवीजन के कुल 33 नलकूपों का संचालन प्रभावित हो चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल से लेकर सिंचाई का हाहाकार मचने से अफसरों में खलबली मची है।

शनिवार को आंदोलनरत कई ऑपरेटर जलसंस्थान कार्यालय पहुंचे। कार्यालय बंद होने के बावजूद बाहर से प्रदर्शन कर अपना गुस्सा निकाला। आंदोलनकारी आनंद सिंह रावत ने बताया कि जब तक न्यूनतम पांच हजार रुपये मानदेय नहीं दिया जाएगा, तब तक नलकूपों का संचालन बंद रखा जाएगा। सोमवार को फिर वह जलसंस्थान दफ्तर पहुंचकर अपनी मांग मुखर करेंगे।

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शासन के आदेश के अनुसार दिया जा रहा मानदेय

जलसंस्थान के अधिशासी अभियंता विशाल कुमार ने बताया कि पिछले साल शासन के आदेश के बाद स्वैप योजना के तहत संचालित कुल 33 नलकूपों को जलसंस्थान में हस्तांतरित किया गया था। ये नलकूप दिसंबर 2017 और जनवरी 2018 में हस्तांतरित हुए। शासन ने ऑपरेटरों को पार्ट टाइम चौकीदार के अंतर्गत 2690 रुपये मासिक मानदेय देने के आदेश दिए हैं। इसी हिसाब से मानदेय दिया जा रहा है। नलकूप आपरेटरों से मांग को देखते हुए श्रम कानून के तहत न्यूनतम मानदेय देने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। अंतिम नीतिगत निर्णय शासन में ही तय होगा। तब तक नलकूपों का संचालन सुचारू रखने का अनुरोध किया गया है।

Posted By: Jagran