रामनगर, जागरण संवाददाता : दीपावली का पर्व करीब आते ही जंगल में उल्लूओं की जान पर आफत आ जाती है। हर वर्ष दिपावली के अवसर पर तंत्र साधना और सिद्धि पाने के लिए उल्लुओं की बलि देने संबंधी अंधविश्वास की वजह से लुप्तप्राय पक्षी के संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे में कार्बेट टाइगर रिजर्व, राजाजी नेशनल पार्क, रामनगर वन प्रभाग व तराई पश्चिमी वन प्रभाग के जंगलों में उल्लुओं की तस्करी रोकने की कवायद शुरू हो चुकी है। वन विभागों में रेंज के स्टाफ को गश्त तेज करने व उल्लुओं की मौजूदगी वाली जगह में निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। तस्‍करी में लिप्‍त मिलने वालों के खिलाफ जंगलात कड़ी कार्रवाई करेगा। 

अंधविश्वास में देते हैं उल्‍लू की बलि

दरअसल दीपावली पर कुछ लोग अंधविश्वास के चलते उल्लू की बलि देकर कई तरह के अनुष्ठान कर अपने हित साधने का प्रयास करते हैं। इसके अलावा कई लोग उल्लु को पकडक़र दीपावली के दिन मां लक्ष्मी के साथ उसकी पूजा भी करते हैं। क्योंकि उल्लु मां लक्ष्मी का वाहन माना जाता। ऐसे में बाजार में उल्लुओं की मांग बढ़ती है। जिससे जंगल में तस्करी का खतरा बढ़ जाता है। यह हाल तब है जब उल्लुओं के शिकार पर कानूनी पाबंदी है।

दुनियाभर के देशों में उल्‍लू की मान्‍यता

विश्वभर की संस्कृतियों के लोकाचार में उल्लू पक्षी को भले ही अशुभ माना जाता हो, मगर यह संपन्नता प्रतीक भी है। यूनानी मान्यता में इसका संबंध कला और कौशल की देवी एथेना से माना गया है तो जापान में इसे देवताओं के संदेशवाहक के रूप में मान्यता मिली है। भारत में हिंदू मान्यता के अनुसार यह धन की देवी लक्ष्मी का वाहन है। यही मान्यता इसकी दुश्मन बन गई है। दीपावली पर उल्लू की तस्करी बढ़ जाती है। विभिन्न क्षेत्रों में दीपावली की पूर्व संध्या पर उल्लू की बलि देने के मामले सामने आते रहते हैं।

संरक्षित प्रजाति है उल्‍लू

उल्लू भारतीय वन्य जीव अधिनियम 1972 की अनुसूची एक के तहत संरक्षित प्रजाति का पक्षी घोषित है। इसके शिकार में पकड़े जाने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है। उल्लुओं को पालना व शिकार करना प्रतिबंध है। वन्य जीवों के अंगों के व्यापार को रोकने काले ट्रैफिक संगठन के मुताबिक दुनिया में मिलने वाली 250 उल्लुओं की प्रजाति में से 36 भारत में मिलती है। रामनगर के पक्षी विशेषज्ञ संजय छिम्वाल के मुताबिक 16 प्रजाति कार्बेट टाइगर रिजर्व व उसके आसपास के जंगल में पाई जाती है। इन दिनों इनकी तस्करी का खतरा बढ़ जाता है। पूरे उत्तराखंड की बात करें तो यहां उल्लू की 19 प्रजातियां चिह्नित की गई हैं। कार्बेट के आसपास ब्राउन फिश, टाउनी फिश, स्‍पाट बीलाइट ईगल फिश, स्‍काप आउल, ब्राउन हाक, ब्राउन वुड जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं।

Edited By: Skand Shukla