संवाद सहयोगी, पिथौरागढ़ : सीमांत जिले पिथौरागढ़ की तहसील धारचूला के छलमाछिलासो गांव में पीढिय़ों से गुजर बसर कर रहे 84 परिवारों को प्रशासन ने स्थानीय मानने से इन्कार कर दिया है। गांव के शेष 52 परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वंचित परिवार अब पुनर्वास के लिए शासन-प्रशासन के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

वर्ष 2017 में छलमाछिलासो गांव आपदा का शिकार हुआ था। कई भवन क्षतिग्रस्त हो गए और कई नाली भूमि बह गई। गांव की जमीनों में दरार पड़ गई। भूगर्भ विभाग ने गांव का सर्वे करने के बाद ग्रामीणों के पुनर्वास की संस्तुति की थी। लंबी प्रकिया के बाद गांव के लोगों को मटखानधार, ढुलसैन, पय्याधार में पुनर्वासित करने की स्वीकृति दी। इसके लिए प्रक्रिया शुरू हुई तो गांव में रहने वाले 84 परिवार पुनर्वास की श्रेणी में शामिल ही नहीं किए गए।

राजस्व विभाग ने जो रिपोर्ट दी उसके मुताबिक इन परिवारों का गांव में कोई मकान नहीं है, जबकि ग्रामीणों का कहना है कि वे पीढिय़ों से गांव के निवासी है। रोजगार की तलाश में वे अस्थायी रू प से इधर-उधर बसे हुए हैं। ग्रामीणों ने अपने रिकार्ड भी राजस्व विभाग को उपलब्ध कराए, लेकिन विभाग ने इन्हें मानने से इन्कार कर दिया। परेशान 84 परिवार अब पुनर्वास के लिए कभी तहसील मुख्यालय तो कभी जिला मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं। शुक्रवार को पिथौरागढ़ पहुंचे ग्रामीण सुमन वर्मा, उमेद प्रसाद वर्मा, चंद्र राम ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि प्रशासन उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। उन्हें पुनर्वासित नहीं किया तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

पुनर्वास के लिए 2.63 करोड़ की धनराशि जारी

छलमा छिलासो गांव के 52 परिवारों के पुनर्वास के लिए शासन ने 2.63 करोड़ की धनराशि जारी कर दी है। इस धनराशि से इन परिवारों को नई जगह पर भवन बनाने के लिए दो-दो लाख रुपये दिए जा रहे हैं साथ ही अन्य सुविधाएं भी जुटाई जा रही हैं। कई परिवारों ने नई जगहों पर मकान बनाने का कार्य शुरू कर दिया है। धारचूला के एसडीएम एके शुक्ला ने बताया कि पुनर्वास के लिए परिवारों का चयन राजस्व रिकार्ड के अनुसार किया गया है। जो भी ग्रामीण पुनर्वास नीति के तहत घोषित मानकों में आएगा उसका पुनर्वास किया जाएगा।

 

Edited By: Skand Shukla