जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा : IMA Passing Out Parade : भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में पासिंग आडट परेड के जरिये कमांडर दीपक सिंह बिनौली ने ड्रिल स्क्वायर पर जैसे ही कदम रखे, कुमाऊं वालों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। पश्चिमी कमान के जीओसी इन सी लेफ्टिनेंट जनरल आरपी सिंह ने दीपक सिंह को स्वर्ण पदक व ब्रिगेड ऑफ गार्ड अवार्ड भेंट किया, पैतृक गांव अनोली मानू (धौलादेवी ब्लॉक) में गांव बिरादरी के लोग खुशी से झूम उठे। कोरोना से बेटे को खो देने के गम में डूबे दादा दादी का दुख प्रतिभावान पोते की उपलब्धि से कुछ कम हुआ। 

दीपक सिंह को फौज में अधिकारी बनने की प्रेरणा नाइन-कुमाऊं रेजिमेंट (केआरसी) से अवकाश प्राप्त ऑनरी नायब सूबेदार त्रिलोक सिंह बिनौली से विरासत में मिली। उसकी मां उमा देवी बिनौली भी उसे जज्बा दिया। दीपक की प्रारंभिक शिक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल अल्मोड़ा से हुई। बचपन से ही मेधावी दीपक ने परीक्षा उत्तीर्ण कर राष्टï्रीय मिलिट्री स्कूल बंगुलुरु में दाखिला लिया। 12वीं तक की पढ़ाई वहीं से की। बंगलुरु से ही दीपक का चयन एनडीए में हो गया। उसने 16वीं रैंक हासिल की। तीन वर्ष प्रशिक्षण लेने के बाद जून 2020 में उसने आइएमए देहरादून में कदम रखा। शनिवार को पासिंग आउट परेड के कमांडर के रूप में उसे मेरिट में स्वर्ण पदक व ब्रिगेड ऑफ गार्ड अवार्ड प्रदान किया गया। पिता ऑनरी नायब सूबेदार त्रिलोक सिंह के मुताबिक सैन्य परिवार से होने के कारण दीपक को नाइन कुमाऊं में ही लखनऊ में पहली पोस्टिंग मिली है। 

हल्द्वानी से ऑनलाइन दादा दादी को दिखाई परेड 

दीपक सिंह के माता पिता बिठौरिया नंबर-एक आदर्शन कॉलोनी हल्द्वानी में बस चुके हैं। उसका छोटा भाई संजय सिंह एमबी महाविद्यालय हल्द्वानी में बीकॉम की पढ़ाई कर रहा है। पिता नायब सूबेदार त्रिलोक सिंह ने यहीं से ऑनलाइन परेड लखनऊ में दीपक के 93 वर्षीय दादा नैन सिंह व दादी बसंती देवी और बाराकोट ब्लॉक के रैगांव (चंपावत) निवासी नाना नानी जगदीश सिंह अधिकारी व नानी जयंती अधिकारी को दिखाई तो वह भावविह्वल हो उठे। 

कोरोना से चल बसे थे चाचा 

दीपक सिंह के लखनऊवासी चाचा बिशन सिंह बिनौली दीपक को अपने पिता की तरह सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया करते थे। बीती 28 अप्रैल को वह कोरोना से जंग हार गए थे। वह अपने भतीजे की इस उपलब्धि को नहीं देख सके। वहीं महामारी के चलते दीपक के माता पिता को भी पासिंग आउट परेड में हिस्सा न पाने का खूब मलाल है।

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