काशीपुर, अभय पांडेय : 2002 का वह दौर जब उत्तर प्रदेश से अलग हुआ उत्तराखंड खेल में अपनी पहचान बनाने में जुटा था। यही वक्त था जब इंटर यूनिवर्सिटी गेम खेलने वाली प्रियंका चौधरी बॉक्सिंग में आगाज कर चुकी थीं। काशीपुर में साई के तहत प्रशिक्षण लेने के बाद उनके मुक्केबाजी ने सिर्फ नेशनल ही नहीं बल्कि अंतरराट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

2008 में भारत के नेशनल टीम में आगाज के बाद उन्होंने एक दशक से कम समय में पांच बार नेशनल प्रतियोगिता जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीन प्रमुख प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर उत्तराखंड की मैरीकाम नाम से भी जानी गईं। प्रियंका का मानना है कि हरियाणा की तर्ज पर अगर हमारे प्रदेश में भी प्रतिभाओं को मौका मिले तो निश्चय ही कई बालिकाएं प्रदेश का नाम रोशन कर सकेंगी।

प्रियंका बताती हैं कि उनके पिता विजय चौधरी उत्तराखंड पुलिस से रिटायर्ड हुए हैं। प्रियंका का कहना है कि उन्होंने क्रिकेट में अपनी शुरुआत की थी, लेकिन वह टीम गेम के साथ ऐसे गेम में जाना चाहती थी जहां वह खुद का सही आंकलन कर सकें, यही कारण था कि उन्होंने बॉक्सिंग को चुना। 2002 से उन्होंने बॉक्सिंग के रिंग में कदम रखा। साई से प्रशिक्षण लेने के बाद उनके बॉक्सिंग पंच की गूंज प्रदेश में सुनाई देने लगी। 2008 में नेशनल प्रतियोगिता में कदम आगे बढ़ाने पीछे मुड़कर नहीं देखा।  

दो बार एशियन चैंपियनशिप में जीत चुकी हैं कास्य पदक

प्रियंका उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक दिलाने वाली पहली महिला बाक्सर हैं। उन्होंने बताया कि प्रियंका ने दो बार एशियन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता है। प्रियंका लगातार तीन साल तक 60 किग्रा भार वर्ग में नेशनल चैंपियन रही हैं। यह कारनामा उन्होंने 2014 से 2017 तक किया। इसके अलावा उन्हें 2017 में बेस्ट बाक्सर भी चुना गया। 

2018 में विश्व में 18वीं रैकिंग की हासिल

वर्ष 2018 में अंतरराष्ट्रीय बाक्सर प्रियंका चौधरी ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर इन दिनों अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैकिंग यानी विश्व में 18वीं रैंक पाकर देश का नाम रोशन किया है। इसके बाद 2019 में एक ङ्क्षबग बाउट इंडिया में उन्होंने स्वर्ण पदक भी जीता। जनवरी 2018 में दिल्ली में इंटरनेशनल ओपन इंडिया बाक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था। इसके अलावा  जून में कजाकिस्तान में दो सीनियर इंटरनेशनल महिला बाङ्क्षक्सग चैंपियनशिप में एक-एक कांस्य पदक हासिल कर चुकी हैं।

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