भीमताल, राकेश सनवाल : अरुणाचल प्रदेश के दो तितली प्रेमियों ने भारत में तितलियों को दो नई प्रजातियां खोज निकाली हैं। इनकी पहचान यहां बटरफ्लाई शोध संस्थान में की गई। ऐसे में अब देश में तितलियों की प्रजाति बढ़कर 1327 हो गई हैं। जो दो नई प्रजातियां खोजी गई हैं उनका नाम स्ट्राइपड हेयरस्ट्रीक (यामामोटोजैफीरूसक्वांगटुंगएनजिस) व एल्युजिव प्रिंस (रोहाना टनकिनइआना ) है।

भीमताल बटरफ्लाई शोध संस्थान द्वारा वर्ष 2015 में प्रकाशित कैटलॉग में भारत में पाई जाने वाली तितलियों की प्रजाति की संख्या 1318 थी। बीते पांच साल में सात और नई प्रजाति की खोज हो चुकी है। दो नई तितलियां मिलने से अब यह संख्या 1327 पहुंच गई है। भारत में नई तितलियों की पहचान की पुष्टि 28 जून 2020 में संस्थान द्वारा अंतरराष्ट्रीय जर्नल बायोनोट्स में की गई है।

स्ट्राइपड हेयरस्ट्रीक तितली बहुत सुंदर है। यह आमतौर पर दक्षिण चीन व उत्तरी म्यांमार में पाई जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो यह दुर्लभ है और एक साल में इसकी एक ही पीढ़ी होती है। इसे अरुणाचल पुलिस में कार्यरत तितलियों की शौकीन रोशन उपाध्याय ने कैमरे में कैद किया। इसकी पहचान के लिए चित्र व नमूने भीमताल बटर फ्लाई शोध संस्थान में भेजे गए। विशेषज्ञों से राय लेने के बाद इसकी पहचान की पुष्टि हुई।

एल्युजिव प्रिंस को खोजेने की कहानी भी रोचक है। वर्ष 2019 में अंटोन्यो गिडिची नाम के थाइलैंड में बसे इटेलियन भूटान में तितलीे देखने गए। इस दौरान उन्होंने ब्लैक प्रिंस नाम की तितली की फोटो खींची। उन्हें लगा थाइलैंड में पाई जाने वाली एल्यूजिव प्रिंस भी उन फोटो में शामिल थी, पर वह उसकी पुष्टि नहीं कर सके। उसी साल अरुणाचल प्रदेश बिजली विभाग में जेई मिनाम पर्रिटन ने ब्लैक प्रिंस के नमूने पहचान के लिए भीमताल भेजे। यहां विशेषज्ञों ने जब उसके जनन अंगों का निरीक्षण किया तो वह एल्युजिव प्रिंस का नर प्रजाति निकला। पता चला कि भारत में भी यह एल्युजिव प्रिंस पाया जाता है।

बटरफ्लाई शोध संस्थान भीमताल के निदेशक पीटर स्मैटाचैक ने बताया कि स्ट्राइपड हेयरस्ट्रीक के पंख में काली घनी लकीरें हैं और उसका पैटर्न भी इससे संबधित प्रजातियों से अलग है। वहीं एल्युजिव प्रिंस के अंगों को जब देखा गया तो इसका प्रजनन अंग अन्य तितलियों से अलग दिखाई दिया। यह दोनों तितलियां भारत के लिए नई हैं  

कॉमन पीकॉक को राज्य तितली का दर्जा 

उत्तराखंड राज्य वन्य जीव बोर्ड ने 'कॉमन पीकॉक' नाम की तितली प्रजाति को राज्य तितली का दर्जा(2016) दिया है। वन्य जीव संरक्षण और प्रचार प्रसार के लिए यह एक बड़ा कदम है। वन्य जीव बोर्ड लंबे समय से जीव संरक्षण के क्षेत्र में काफी अग्रणी भूमिका निभाते आ रहा है। बता दें कि 'कॉमन पीकॉक' तितली की एक दुर्लभ प्रजाती है जो केवल भारत के हिमालयी क्षेत्रों (7000 फीट) में पाई जाती है। 

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Posted By: Skand Shukla

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