काशीपुर, अभय पांडेय : कोरोना वायरस ने बाजार और व्यापार दोनों के स्वरूप को बदलने के लिए विवश कर दिया है। जाहिर तौर इस दौरान डिजिटल मार्केटिंग पर लोगों की निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में मौके की नजाकत को समझते हुए काशीपुर आइआइएम के उदय प्रशिक्षण का हिस्सा रह चुके निखिल ने बीजक नाम से एक ट्रेडिंग एप बनाया। बीजक एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफाॅॅर्म है। जो कृषि व्यापार के लेनदेन में मुफ्त सुविधा देता है। इसका उद्देश्य कृषि उपज के व्यापार में सूचना, विषमता और जवाबदेही की कमी लाना है।

 

 

 

बीजक देश भर की मंडियों के लिए व्यसायियों के निष्पक्ष रेटिंग और मार्केट खोजने में मदद करता है। इस एप ने आज 22 राज्यों में 400 मंडियों के ट्रेडर्स व किसानों के बीच सेतु बनाने का काम किया है। हाल में बड़ी निवेशक कंपनी ने इस एप में करीब 100 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस एप को शुरू करने वाले वाले इलाहाबाद निवासी निखिल त्रिपाठी बताते हैं कि उनका और उनकी टीम का मकसद किसानों को नकदी का त्वरित भुगतान व ट्रेडर्स के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफार्म उपलब्ध कराना है।

 

कोरोना वैश्विक महामारी ने भारत सरकार समेत दुनियाभर को सबसे बड़े लॉकडाउन को लागू करने के लिए मजबूर कर दिया। इस दौरान कृषि बाजार में आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के कारण समय पर क्रय-विक्रय भी प्रभावित हो रहा है। लॉकडाउन के बाद, करीब 50-60% मंडियों में लेनदेन प्रभावित हो रहा है। जिसने प्रत्यक्ष कृषि व्यापारियों (साढ़े दस करोड़ व्यापारियों ) और कुल कृषि क्षेत्र में कार्यरत (21 करोड़ कार्यबल) को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। ऐसे समय में कृषी मंडी व व्यापारियों के लिए बीजक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म संजीवनी साबित हुआ है।

 

लाखों को पैकेज छोड़ पांच दोस्तों ने शुरू किया काम

निखिल उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद के झूंसी के एक छोटे से गाँव से आते हैं। अपनी प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने एनआईटी मेघालय 2017 में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। एक किसान के बेटे के रूप में निखिल के दिमाग में हमेशा रहता था कि कुछ ऐसा करना है कि किसानों को लाभ मिल सके। इसके बाद देश के एक नामी मल्टीनेशनल कंपनी में इनकों ब्रेक मिला और लाखों के सलाना पैकेज पर काम करने लगे।

 

2019 में नौकरी छोड़ अपना स्टार्टअप शुरू किया

वर्ष 2019 में नौकरी छोड़ निखिल ने अपना स्टार्टअप शुरू किया। वर्ष 2019 अक्टूबर में इन्होंने काशीपुर आइआइएम की फीड टीम से स्टार्टअप का प्रशिक्षण मिला। बीजक नाम से इस प्रोजेेक्ट को शुरू करने में उनका साथ इंदौर के नुकुल उपाध्याय ने दिया। जो अमेरिका में एक कंपनी में कंसलटेंसी का काम छोड़ शामिल हुए तो हिसार के जितेन्द्र आआइटी जैसा संस्थान छोड़कर इस प्राजेेक्ट से जुड़े। हैदराबाद के रहने वाले महेश ने बिड़ला इंडयूटी आफ टेक्टनालीजी से पढ़ाई के बाद इस फर्म में शामिल हुए। बनारस बीएचयू के प्रोडेक्ट दया राय भी आज कंपनी महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

 

उत्तर प्रदेश के कन्नौज से शुरू किया गया काम

बीजक कंपनी ने पहले यूपी के कन्नौज से अपना काम शुरू किया। निखिल ने पहले आलू के सप्लाई की चैन समझनी शुरू की। इसमें रिर्सच में पाया गया कि देश में सप्लाई चैन में सूचना, विषमता और जवाबदेही की कमी है। सप्लायर का पैसा फंसता है तभी किसानों तक त्वरित भुगतान नहीं हो पाता हैं। इन लोगों ने पहले आलू की सप्लाई चैन में सप्लायर, आढ़ती व किसानों से संपर्क किया। इन्होंने कोल्ड स्टोर से अलग-अलग मंडियों के आढतियों को जोड़ने का काम किया और पहला खेप आलू गोरखपुर, बिहार व छतीसगढ़ मंडी तक भेजा। इसके बाद मंडियों के अच्छे आढ़तियों की रेंटिग तैयार की गई। आज 22 राज्यों में तकरीबन 500 लोकेशन पर बीजक अपना काम कर रही है। छोटे जिले में बैठा आढ़ती नासिक से प्याज के साथ अनाज भी मंगा लेता है। राजस्थान, मप्र, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश व दक्षिण भारत के राज्य भी इस चेन के जरिये जुड़ चुके हैं।

 

एक साल में ही कंपनी में 100 करोड़ का निवेश

स्टार्टअप से जुड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशकों आमनिवोर, ओमिदायर, सीकोया व आरटीवी ने तकरीबन 100 करोड़ रुपये इस कंपनी की इक्ववीटी फंड के रूप में निवेश किया है। इन कंपनियों को इस प्रोजेक्ट में भारत के अंदर सबसे तेजी से बढ़ने की संभावना दिख रही है।

 

क्या हुए फायदे

  • देश की सभी मंडियों के उत्पादों के अपडेट दाम
  • देश की मंडियों में आढ़तियों की रेंटिंग
  • किसान को सिर्फ फसल उगाने की चिंता, मार्केट देगा बीजक
  • किसान व व्यापरियों को सुरक्षित व त्वरित भुगतान
  • क्षेत्रीय प्रोडेक्ट को बड़ा मार्केट उपलब्ध कराया
  • किसानों के लिए नए मार्केट तलाशता है बीजक
  • व्यापरियों के क्रेडिट भुगतान की सुविधा
  • ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा

सीमा पर संचार सेवा के मामले में नेपाल से पिछड़ा भारत, करोड़ों का राजस्व जा रहा नेपाल 

44 साल बाद दोबारा उत्तराखंड पहुंची पहाड़ी बया, असम के काजीरंगा में भी है बसेरा  

Posted By: Skand Shukla

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस