लालकुआं, जेएनएन : सरकार एक तरफ कारोबारियों को छूट देने की बात कर रही है वहीं दूसरी तरफ गौला व नंधौर नदी में खनन कार्य में लगे वाहनों पर रियायत बरतने के बजाय टैक्स का दोहरा बोझ डालकर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। गौला नदी में पंजीकृत वाहन स्वामियों को 75 से 120 दिन उपखनिज ढोने के एवज में 270 दिन का टैक्स व इंश्योरेंस का भुगतान करना पड़ रहा है।

बता दें इस बार गौला नदी में एक नवंबर 2019 से खनन कार्य शुरू किया गया। जिसके बाद भारत सरकार से मिली अनुमति समाप्त होने पर 28 फरवरी 2020 को काम बंद कर दिया गया। राजस्व की कमी को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा नदी की दोबारा पैमाइश कर 11 मार्च को गौला नदी को फिर से उपखनिज चुगान के लिए खोल दिया गया। अभी गाड़ियां चुगान के लिए तैयार ही हुई थी कि कोरोना संक्रमण के चलते 22 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन लग गया।

,इधर लॉकडाउन खुलने के बाद सरकार द्वारा खनन कार्य के लिए सात मई को दोबारा से गौला नदी को खोला गया और खनन सत्र समाप्त होने पर 31 मई को बंद कर दिया गया, लेकिन सरकार ने राजस्व हित में मजदूरों व वाहन चालकों की जान जोखिम में डालकर सात जून को एकबार फिर गौला नदी के कुछ गेटों को खनन के लिए खोल दिया। जिन्हें 26 जून को बंद किया गया। जिस हिसाब से इस बार गौला नदी को कई चरणों में 170 दिन के लिए खोला गया उसमें साप्ताहिक छुट्टी व अन्य अवकाशों को लगाकर सभी चरणों में खुले निकासी गेटों में पंजीकृत वाहनों को 120 दिन ही काम मिला।

देवरामपुर, बेरीपड़ाव, हल्दूचौड़, मोटाहल्दू सहित कई अन्य गेटों के वाहनों को मात्र 75 से 90 दिन ही काम मिल पाया। इधर परिवहन विभाग द्वारा वाहन स्वामियों से अब तक दो बार में 180 दिन का टैक्स लिया जा चुका है जबकि 90 दिन का टैक्स और जमा करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जबकि पूर्व में सरकार द्वारा लाकडाउन में टैक्स में छूट देने का भरोसा दिया गया था। इसके अलावा इंश्योरेंस भी 270 दिन का ही इस्तेमाल किया गया है। एआरटीओ हल्द्वानी संदीप वर्मा ने कहा कि वाहन स्वामियों को एक तिमाही किस्त और भरनी है। सरकार द्वारा परिवहन विभाग को लॉकडाउन के दौरान टैक्स छूट का कोई भी आदेश नहीं दिया गया है।

वाहनों के सरेंडर की प्रक्रिया में भी की गई देरी

परिवहन विभाग द्वारा वाहन स्वामियों से एक तिमाही का करीब 48 सौ रुपये का टैक्स लिया जाता है। इसी प्रकार एक वाहन के इंश्योरेंस में 38 हजार रुपये लगते हैं। हैरत की बात है कि मजदूर न होने व खनन गेटों के नहीं खुलने के कारण कुछ वाहन तो लॉकडाउन के बाद दो-चार दिन ही चल पाए। ऐसे में सरकार अगर वाहनों को सरेंडर करने की प्रक्रिया पहले शुरू कर देती तो मोटाहल्दू, बेरीपड़ाव, देवरामपुर व हल्दूचौड़ गेट में पंजीकृत वाहन पहले ही सरेंडर हो जाते। जिससे उनका इंश्योरेंस का पैसा तो बचता ही वही टैक्स भी जमा नही करना पड़ता।

वाहन स्वामियों ने लगाया उत्पीड़न का आरोप

मोटाहल्दू किसान सेवा समिति के अध्यक्ष हेम दुर्गापाल, लवली गिल, रमेश जोशी, शेखर जोशी समेत तमाम वाहन स्वामियों का कहना है कि परिवहन विभाग द्वारा उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। कई गेट काफी पहले बंद हो गए बावजूद इसके उनको सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। वाहन स्वामी पहले ही आर्थिक तंगी व कर्ज की मार झेल रहे हैं इसलिए टैक्स में छूट मिलनी चाहिए।

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