हल्द्वानी, जेएनएन : कोविड-19 महामारी के पांच महीने गुजर जाने के बाद भी दवाइयां व वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो सकी हैं, फिर भी कोविड अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज चल रहा है और काफी संख्या में मरीज स्वस्थ भी हो चुके हैं। यह हो रहा है एंटीबायोटिक दवाओं से। सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए सबसे अधिक एंटीबायोटिक दवाइयां ही इस्तेमाल हो रही हैं।

 

पूरे कुमाऊं से मरीज एसटीएच में ही भर्ती हो रहे हैं। अब तक 217 मरीज यहां से डिस्चार्ज हो चुके हैं, लेकिन इलाज को लेकर डॉक्टरों के सामने चुनौती कम नहीं है। अस्पताल में भर्ती छह मरीज दम भी तोड़ चुके हैं। ऐसे में दवाइयों को लेकर लगातार शोध चल रहा है। वहीं, राजकीय मेडिकल कॉलेज के एसटीएच कोविड अस्पताल में मरीजों को एचसीक्यू (हाइड्रोक्सीक्लोरीक्वीन) व डेक्सामिथासोन दवा दी जा रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जिनमें हल्के लक्षण हैं, ऐसे मरीजों को एचसीक्यू ही दिया जा रहा है। जिन मरीजों में कोरोना से संबंधित ज्यादा लक्षण हैं, तो ऐसे मरीजों के लिए डेक्सामिथासोन है।

 

हालांकि, कई ऐसे कोरोना पॉजिटिव मरीज हैं, जिन्हें कई अन्य बीमारियां भी है। इन्हें संबंधित बीमारी में उपयोग होने वाली दवाइयां दी जा रही हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि अस्पताल से स्वस्थ होकर जाने वाले मरीजों की संख्या अधिक है।

 

प्रो. अरुण जोशी, चिकित्सा अधीक्षक, एसटीएच ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मॉनीटरिंग की जरूरत ज्यादा है। इस पर खास ध्यान रखा जाता है। इसके लिए डॉक्टरों व पैरोमेडिकल स्टाफ की टीम नियमित लगी हुई है। डॉक्टरों के निर्देशन में ही एचसीक्यू व डेक्सामिथासोन समेत अन्य एंटीबायोटिक दवाइयां दी जा रही हैं। अस्पताल से अधिकांश मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज कर दिए गए हैं। 

कुमाऊं मंडल में रविवार को सिर्फ एक नया मामला सामने आया 

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