नैनीताल, रमेश चंद्रा : आकाशगंगा का विशाल तारा बेटेल्गयूज़ जीवन की आखिरी सांस ले रहा है। पृथ्वी से 700 प्रकाश वर्ष दूर इस तारे में कभी भी महाविस्फोट हो सकता है। विस्फोट के बाद यह तारा ब्लैकहोल या न्यूट्रान स्टार में तब्दील हो सकता है। पांच माह के अंतराल में इस तारे की चमक में 25 फीसद कमी आ गई है।

सूर्य से करीब 19 गुना भारी है तारा

भारतीय तारा भौतिकी संस्थान बेंग्लुरु के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक रिटायर्ड प्रो. आरसी कपूर के अनुसार बेटेल्गयूज़ मृग तारा समूह का तारा है। सूर्य से करीब 19 गुना भारी है, जबकि नौ सौ गुना बड़ा है। इस तारे का भारतीय नाम आद्रा नक्षत्र है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके आकार के फैलने का सिलसिला लगभग 40 हजार साल पहले शुरू हो चुका था, जो अब विशाल आकार ले चुका है। यूरोपियन सदर्न आब्जर्वेटरी की वेरी लार्ज टेलीस्कोप इस पर नजर रखे हुए है। इसके अंतिम अवस्था को लेकर वैज्ञानिकों का मानना है कि विस्फोट के बाद आकाश में यह सूर्य व चंद्रमा के बाद तीसरे नंबर का चमकता हुआ दिखाई देगा। इसकी चमक काफी समय तक नजर आती रहेगी।

पहले भी हो चुका है विशाल तारे में महाविस्‍फोट

सैकड़ों वर्षों में होने वाली इस दुर्लभ खगोलीय घटना को लेकर वैज्ञानिक काफी रोमांचित हैं। परंतु इसके विस्फोट को लेकर निश्चित समय का आंकलन अभी नहीं किया जा सकता है। किसी विशाल तारे में इस तरह का महाविस्फोट इससे पूर्व 1604 में हुआ था। इससे पूर्व 1006, 1054 व 1572 में भी महाविस्फोट हो चुके हैं। इस तारे के बारे में वैज्ञानिकों को 1836 में पता चला था। तभी से इस तारे में वैज्ञानिक नजर रखे हुए हैं। अब पिछले कुछ समय से इसकी चमक में आई कमी से अंदाजा लगाया जा रहा है कि जल्द ही इसका अंत हो जाएगा। यह सूपरनोवा विस्फोट होगा।

आगे के अध्‍ययन में होगी सुविधा

बेटेल्गयूज़ तारे में विस्फोट से पहले वैज्ञानिकों को पता चल जाएगा कि विस्फोट से पूर्व तारे की स्थिति क्‍या होती है। जिससे इस तरह के तारों के अंत समय की स्थिति के साथ आगे के अध्ययन में आसानी हो जाएगी। यह लाल रंग का विशाल तारा है, जो हमारी आकाशगंगा का 12वें नंबर का चमकदार तारा है। विस्फोट के बाद विशाल उर्जा के विकिरण से  इसकी चमक बढ़ जाएगी।

सूर्य से 20 से 30 गुना बड़े होते हैं बड़े तारे

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे का कहना है कि दूसरी आकाशगंगाओं में बड़े तारों में विस्फोट होते रहते हैं। इस तरह के तारे सूर्य से 20 से 30 गुना बड़े होते हैं। बेटेल्गयूज़ आकाश गंगा में ग्यारहवें-सबसे चमकीला सितारा है। यह पूथ्‍वी से करीब 700 प्रकाश-वर्ष की दूरी पर स्थित है। 10 मिलियन वर्ष से कम पुराना, बेटेल्गयूज़ अपने बड़े द्रव्यमान के कारण तेजी से विकसित हुआ है। संभावना है कि यह सुपरनोवा विस्फोट के साथ खत्‍म होगा।

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Posted By: Skand Shukla

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