जागरण संवाददाता नैनीताल : थाईलैंड की राजकुमारी महाचक्री सिरिनधोर्न ने गुरुवार को एरीज की देवस्थल स्थित एशिया की सबसे बड़ी दूरबीन से चांद-तारों का दीदार किया। एस्ट्रोनॉमी में भारत के साथ गहरे रिश्ते बनाने का भरोसा दिया। एरीज की तीनों दूरबीनों से आसमान का नजारा देखते वक्त उनके चेहरे पर खुशी अलग ही चमक रही थी।

तय समय के मुताबिक शाम 5.35 मिनट पर राजकुमारी देवस्थल पहुंचीं। यहां से हिमालय पर पड़ती सूर्य की किरणों का नजारा लिया। इसके बाद 3.6 मीटर की टेलिस्कोप देखी। एरीज में दूरबीन से एक तरफ वीनस तो दूसरी तरफ ओरायन नक्षत्र के दर्शन किए। आकाश गंगाओं की तस्वीरें लीं। कहा कि इस खास दूरबीन को देखना उनके जीवन का एक यादगार लम्हा है।

इसके बाद चार मीटर की लिक्विड मेरर टेलिस्कोप देखने पहुंचीं। एरीज के वैज्ञानिकों ने इसके जरिए चांद-तारों व नक्षत्रों की तस्वीरें लेने की विधि बताई। इसके बाद प्रिंसेस 1.3 मीटर की टेलिस्कोप की डोम पर पहुंचीं। वैज्ञानिकों ने टेलिस्कोप को पहले से ही सौरमंडल के ग्रहों पर फोकस कर दिया था। प्रिंसेस ने कहा कि एरीज व भारत के लिए गर्व करने वाली बात है कि ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने के लिए आधुनिक सुविधाएं जुटा ली हैं। अब जल्द ही भारत के साथ संयुक्त कार्यशाला आयोजित कर खगोल विज्ञान की संभावनाओं पर विमर्श के बाद योजनाएं बनाई जाएंगी। एरीज के निदेशक प्रोफेसर दीपंकर बैनर्जी ने बताया किथाई राजकुमारी का एरीज भ्रमण गर्व करने वाली बात है। अब खगोल विज्ञान को आगे ले जाने में नई राह मिलेगी। एरीज के पूर्व निदेशक डॉ. वहाब उदीन ने कहा कि इस टेलिस्कोप को स्थापित करने में भले ही कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा हो लेकिन इसके सुखद परिणाम हम सबके सामने हैं। रात 7.50 बजे राजकुमारी रुद्रपुर को लौट गईं। देवस्थल आने से पूर्व भीमताल स्थित एक होटल में प्रिंसेस ने जलपान किया। दूसरी ओर, आइआइए बेंगलुरू की निदेशक डॉ. अनपूर्णी सुभ्रमण्यम भी देवस्थल पहुंचीं। उन्होंने राजकुमारी व एरीज के वैज्ञानिकों से भविष्य में खगोल विज्ञान पर साथ काम करने की बात कही। राजकुमारी ने भविष्य में विचार करने की बात कही। इस मौके पर एरीज के वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पाडे, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. सौरभ, रवींद्र कुमार समेत थाईलैंड के वैज्ञानिक मौजूद रहे। मीडिया से बनाई रखी दृरी

नैनीताल : शासन-प्रशासन की टीम राजकुमारी की सुरक्षा में मुस्तैद रही। इस दौरान मीडिया को राजकुमारी से मिलने का मौका तक नहीं मिला।

Posted By: Jagran

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