संवाद सहयोगी, लालकुआं: खनन पट्टों की स्वीकृति के लिए पर्यावरण अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने की बाध्यता पर केंद्र सरकार ने कुछ राहत दी है। इस प्रमाणपत्र के बगैर पट्टे तो मिल जाएंगे, लेकिन पट्टाधारक को खनन कार्य शुरू करवाने से पहले सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा। इस निर्णय से प्रदेश में उन आवेदकों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिन्हें राज्य सरकार की ओर से आशय पत्र तो मिल चुका है, लेकिन पर्यावरण एनओसी नहीं मिल पाने की वजह से पट्टों की स्वीकृति नहीं मिल पाई थी। हालांकि यह परिवर्तन सिर्फ 11 जनवरी तक है। 11 जनवरी से छह माह पहले तक किसी भी आवेदक को आशय पत्र मिला है तो उसे पर्यावरण एनओसी की जरूरत नहीं होगी।

केंद्रीय खान व खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2015 के अनुसार अब तक खड़िया व रेता-बजरी के लिए पट्टों की स्वीकृति उसी व्यक्ति व संस्था को मिलती थी जो पर्यावरण अनापत्ति पत्र प्रस्तुत करता था। नए आदेश के तहत केंद्रीय खान मंत्रालय द्वारा उक्त नियमों में थोड़ी सी ढील देते हुए बिना पर्यावरण अनापत्ति पत्र के ही खनन पट्टे स्वीकृत करने के आदेश जारी किए है। चार जनवरी को संयुक्त सचिव सुभाष चंद्र की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इस ढील के बाद पट्टा मिलने पर पट्टाधारक खनन तभी खनन शुरू कर सकता है जब वह पर्यावरण अनापत्ति पत्र प्राप्त कर ले। इसके साथ ही यह नियम उन लोगों पर ही लागू होगा, जिनके द्वारा 11 जनवरी 2017 तक या उससे पहले खनन पट्टों का आशय पत्र प्राप्त कर लिया गया हो। आशय पत्र छह माह के लिए मान्य होता है। अब तक की बाध्यता यह थी कि आशय पत्र के बाद जब तक पर्यावरण अनापत्ति पत्र प्रस्तुत न हो, सरकार खनन पट्टे जारी नहीं करती थी। हालांकि 11 जनवरी के बाद यह व्यवस्था मान्य नहीं होगी, लेकिन ताजा फैसले से प्रदेश में करीब 200 कारोबारियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

-भारत सरकार के खान मंत्रालय से नए आदेश की प्रति प्राप्त हुई है। उसके अनुसार ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।

-राजपाल लेघा, उपनिदेशक, खनन विभाग, कुमाऊं परिक्षेत्र

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