जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : अंकिता भंडारी की हत्या के बाद राजस्व पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। पटवारी दफ्तर में गुमशुदगी लिखवाने के बावजूद कुछ नहीं किया गया। मामला सुर्खियों में आने के बाद रेगुलर पुलिस को जांच सौंपी गई। जिसके बाद सामने आई कहानी ने उत्तराखंड समेत पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यही वजह है कि राजस्व गांवों को अब रेगुलर पुलिस के जिम्मे देने की कवायद शुरू होने लगी है। कुमाऊं के छह जिलों में 1221 गांवों को चिह्नित किया गया है। नैनीताल जिले के 56 गांव भी इसमें शामिल हैं। प्रस्ताव जल्द पुलिस मुख्यालय पहुंच जाएगा।

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बनेंगे नए थाने व चौकियां

कुमाऊं में छह जिले ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ आते हैं। तराई का जिला मैदानी होने के कारण यहां की सुरक्षा व्यवस्था पुलिस के हाथों में हैं। लेकिन बाकी पांच जिलों में राजस्व गांव की बड़ी संख्या है। जिस वजह से यहां अपराध नियंत्रण, सुरक्षा और संदिग्धों की निगरानी को लेकर अक्सर दिक्कत आती है। इसलिए मंडल स्तर पर 1221 राजस्व गांवों को रेगुलर पुलिस की निगरानी में लाने को प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसके तहत नए थाने और चौकियों का निर्माण भी करना पड़ेगा। वहीं, हाई कोर्ट में भी राजस्व पुलिस व्यवस्था समाप्त करने को जनहित याचिका दायर हो चुकी है।

पटवारी-कानूनगो अपराधियों से लड़ने में सक्षम नहीं

राजस्व पुलिस में पटवारी, लेखपाल, कानूनगो और नायब तहसीलदार जैसे कर्मचारी होते हैं। इनका मुख्य फोकस राजस्व वसूली होता है। ऐसे में सुनियोजित तरीके से शांत पर्वतीय क्षेत्र में बसने वाले अपराधियों से लड़ना इनके बस की बात नहीं। इसके अलावा काम का दबाव भी इनकी कार्यशैली को प्रभावित करता है। साथ ही इनके पास पुलिस की तरह ट्रेनिंग भी नहीं होती।

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राजस्व पुलिस संदिग्धों से अंजान

राजस्व गांवों में सबसे बड़ी दिक्कत सत्यापन को लेकर रहती है। स्टाफ व संसाधन नहीं होने से इस बात का पता नहीं चल पाता कि कब और कौन बाहरी यहां बस गया। इनमें बिल्डरों से लेकर आपरधिक प्रवृत्ति के रसूखदार लोग तक शामिल हैं। अंकिता के मर्डर बाद पर्वतीय क्षेत्र में होटलों व रिसोर्ट के सत्यापन के दौरान कई कमियां आना इस बात का प्रमाण है कि राजस्व पुलिस संदिग्धों से अंजान रहती है।

कुमाऊं के सभी जिलों से प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। राजस्व गांव रेगुलर पुलिस के दायरे में आने से सत्यापन में तेजी आएगी। आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई भी होगी।

-डा. नीलेश आनंद भरणे, डीआइजी कुमाऊं

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Edited By: Rajesh Verma

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