रुड़की, जेएनएन। बीड़ी हो या सिगरेट ऐसी लत थी कि एक नहीं दो नहीं दिनभर में तीस से चालीस बीड़ी या बीस सिगरेट तो आम बात थी। बिना बीड़ी, सिगरेट के रहना मुश्किल था, लेकिन 12 साल पहले सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर धूमपान करने पर रोक लगाई तो शर्म महसूस होने लगी और एक झटके में 29 साल से लगातार पी जा रही बीड़ी सिगरेट को छोड़ दिया। अब तो धुंए से भी नफरत हो गई है। गन्ना विभाग में कार्यरत ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक दिग्विजय सिंह बड़े गर्व से बताते हैं कि अब तो वह दूसरे लोगों को भी कहते हैं कि बीड़ी-सिगरेट से दूरी जरूरी है।

गन्ना विकास परिषद इकबालपुर में कार्यरत ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक दिग्विजय सिंह को कौन नहीं जानता है। नियमों के पक्के दिग्विजय सिंह से जुड़ी एक बात उनको सभी से अलग करती है। उन्होंने बताया कि नौकरी की शुरुआत के साथ ही वह किसानों से जुड़े रहे। फील्ड की नौकरी थी तो उनके साथ रहना। इसके साथ ही उनको बीड़ी-सिगरेट और हुक्का पीने की भी आदत पड़ गई।

29 साल पहले तक तो दिन में दो या चार बीड़ी-सिगरेट ही पी जाती थी, लेकिन इसके बाद तो वह चेन स्मोकर बन गए। एक दिन में बीड़ी के दो-दो पैकेट समाप्त कर देते थे। इसके अलावा सिगरेट का एक पैकेट पूरे दिन में पी जाते थे। स्थिति यह थी घर हो या दफ्तर, सफर करते हुए बीड़ी की तलब लगती थी। ट्रेन में भी छिपकर बीड़ी-सिगरेट पीने की कोशिश में रहते थे। 12 साल पहले केंद्र सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर धूमपान करने पर रोक लगा दी तब उन्हें लगा कि यदि वह सार्वजनिक स्थान पर ऐसा करते हुए पकड़े गए तो क्या होगा। इज्जत खाक में मिल जाएगी। वह अंदर तक सिहर उठे। 

इसके बाद उन्होंने प्रण लिया कि ताउम्र बीड़ी-सिगरेट, हुक्का को हाथ नहीं लगाएंगे। इतना ही यदि पास से कोई सिगरेट पीते हुए निकल जाता है तो उससे भी नफरत होने लगी है। अब दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं। कई लोगों ने बीड़ी-सिगरेट छोड़ा भी हैं।

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