जागरण संवाददाता, हरिद्वार: एसएमजेएन कालेज के व्याख्यान कक्ष में योग से संबंधित एक दिवसीय कार्यशाला में योगाचार्य रजनीश ने बताया कि भारतीय धर्म और दर्शन में योग का अत्यधिक महत्व है। आध्यात्मिक उन्नति या शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग की आवश्यकता को प्राय: सभी दर्शनों और भारतीय धार्मिक संप्रदायों ने एकमत और मुक्तकंठ से स्वीकार किया है।

शिक्षक और छात्र-छात्राओं को योगाभ्यास की जानकारी देते हुए अभ्यास भी कराया। साथ ही आसनों की महत्ता को विस्तार से बताया। कहा कि आसनों के अभ्यास से मानव शरीर की जड़ हो चुके जोड़ और मांसपेशियां लचीली हो जाती है, जिससे शरीर की ऊर्जा का विस्तार होने लगता है। योगी ने बताया कि महर्षि पतंजलि के अनुसार योग की परिभाषा है 'स्थिरं सुखं आसनं' अर्थात स्थिरतापूर्वक किसी भी स्थिति में सुख से लंबे समय तक बैठे रहना ही आसन है। योगी रजनीश ने बताया कि योगाभ्यास से मनुष्य अपने शरीर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर सकता है, जिससे उसके भीतर एक नवीन ऊर्जा का संचार होता है। रोग, शोक, दुख, तनाव आदि स्वत: ही समाप्त हो जाते हैं। योगी ने सभी साधकों को कमर दर्द, सर्वाइकल, मधुमेह, ब्लड-प्रेशर, मोटापा, माइग्रेन आदि समस्याओं से संबंधित योग आसनों में स्कंध चालन, गोरक्षासन, नाड़ी संचालन, ताड़ासन आदि के साथ ही इंद्रियों की एकाग्रता के साथ ही मन की शांति के लिए प्राणायामका अभ्यास भी कराया। कहा कि आज मनुष्य व्यस्त जीवनशैली के चलते विभिन्न रोगों से ग्रस्त हो चुका है जैसे सर्वाइकल, मधुमेह, ब्लड प्रेशर आदि। इन सबसे छुटकारा पाने का एकमात्र साधन योगाभ्यास ही है। प्राचार्य डा. सुनील कुमार बत्रा ने बताया कि आधुनिक युग में मनुष्य की व्यस्तता और मन की व्यग्रता के कारण योग का महत्व बढ़ गया है। समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डा. जगदीशचंद्र आर्य, राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष विनय थपलियाल, डा. विनीता चौहान, रिचा मिनोचा, डा. शिवकुमार चौहान, कविता छाबड़ा, रिकल गोयल, वैभव बत्रा आदि उपस्थित थे।

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